14.1 C
London
Tuesday, June 9, 2026
Home Business 'थोड़ी शर्म-हिम्मत दिखाओ', सांसद यूसुफ पठान पर बरसीं महुआ मोइत्रा

'थोड़ी शर्म-हिम्मत दिखाओ', सांसद यूसुफ पठान पर बरसीं महुआ मोइत्रा

0
71

तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने सोमवार को बहरामपुर के सांसद और पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान पर पार्टी के बागी गुट का साथ देने का आरोप लगाते हुए उनकी कड़ी आलोचना की. यह घटना पार्टी के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 के अलग होकर एक अलग गुट बनाने के कुछ घंटों बाद हुई.

दरअसल, बागी सांसदों में से एक काकोली घोष ने दावा किया था कि 20 बागी सांसदों में यूसुफ पठान भी शामिल हैं और ये सभी NDA को सपोर्ट करेंगे. 

इस घटनाक्रम के बीच कृष्णानगर से लोकसभा सांसद मोइत्रा ने क्रिकेटर से राजनेता बने पठान की कथित तौर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा बुलाए जाने के बाद नई दिल्ली जाने की जल्दबाजी के लिए आलोचना की.

सम्बंधित ख़बरें

महुआ ने लिखा, ‘हमारे जिले ने आपको भारी बहुमत से जिताया है. थोड़ी शर्म करो और थोड़ा साहस दिखाओ.’

And @iamyusufpathan you are rushing to Delhi because @AmitShah has called you? Have some courage. You played for India. Our district voted you in with a huge margin. Have some shame & some spine.

— Mahua Moitra (@MahuaMoitra) June 8, 2026

मोइत्रा अब तक पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ मजबूती से खड़ी हैं. बता दें कि TMC 1998 में अपने गठन के बाद से सबसे बुरे संकट का सामना कर रही है.

महुआ ने TMC के बागी विधायकों पर तीखा हमला करते हुए उन्हें ‘पूरी तरह से बेकार’ नेता बताया, जो केवल ममता बनर्जी के करिश्मा के दम पर टिके हुए थे.

उठी थी यूसुफ पठान के इस्तीफे की चर्चा

पठान कुछ दिन पहले से चर्चा में हैं. एक बंगाली दैनिक ने खबर दी थी कि टीएमसी ने पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली की मदद ली थी ताकि पूर्व क्रिकेटर को बहरामपुर सांसद पद से इस्तीफा देने के लिए राजी किया जा सके, जिससे बनर्जी के लिए उस सीट से उपचुनाव लड़ने का रास्ता साफ हो सके.

रिपोर्ट में आगे दावा किया गया कि पठान ने प्रस्ताव को ठुकरा दिया था.

रिपोर्ट के अनुसार, टीएमसी बहरामपुर को बनर्जी के लिए एक सुरक्षित निर्वाचन क्षेत्र मानती थी, जहां मुस्लिम, जो पार्टी का एक प्रमुख समर्थक आधार हैं, मतदाताओं का अनुमानित 50-52 प्रतिशत हिस्सा थे.

हालांकि, गांगुली ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया था. फिर पठान की भी सफाई आई थी, उन्होंने भी इस खबर को गलत बताया था.

पठान ने 2024 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस के दिग्गज नेता अधीर रंजन चौधरी को हराया था और 1990 के दशक के उत्तरार्ध में पार्टी के गठन के बाद से बहरामपुर से जीत हासिल करने वाले पहले टीएमसी उम्मीदवार बने थे.

टीएमसी के लोकसभा सांसदों में फूट

मोइत्रा की ये ताजा टिप्पणी लोकसभा के मुख्य सचेतक काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में 20 सांसदों द्वारा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए को समर्थन देने की घोषणा करने के कुछ घंटों बाद आई है.

बागी खेमे के सूत्रों ने बताया कि सांसदों की तत्काल टीएमसी छोड़ने या औपचारिक रूप से बीजेपी में शामिल होने की कोई योजना नहीं है. इसके बजाय, वे एनडीए को समर्थन देते हुए एक अलग संसदीय समूह के रूप में काम करने का इरादा रखते हैं.

इस कदम को दलबदल विरोधी कानून के तहत बागी सांसदों को अयोग्य घोषित होने से बचाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है.

टीएमसी विधायकों में भी फूट

सोमवार का यह घटनाक्रम तृणमूल कांग्रेस से निष्कासित विधायकों ऋतब्रत बनर्जी और संदीपान साहा द्वारा एक पत्र प्रस्तुत करने के कुछ ही दिनों बाद हुआ है, जिसमें उन्होंने 60 विधायकों के समर्थन का दावा किया था. 58 विधायकों द्वारा साइन किए गए लेटर में विपक्ष के नेता के पद के लिए ऋतब्रत के नाम का प्रस्ताव रखा गया था.

इस कदम को ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी को अलग-थलग करने के प्रयास के रूप में देखा गया, जिन पर ऋतब्रत ने बार-बार पार्टी को एक राजनीतिक आंदोलन के बजाय एक कॉर्पोरेट संगठन की तरह चलाने का आरोप लगाया है.

60 विधायकों के समर्थन से, ऋतब्रत और संदीपान ने दलबदल विरोधी कानून के तहत आवश्यक दो-तिहाई बहुमत का आसानी से पार कर लिया. यह संख्या औपचारिक विभाजन की स्थिति में उनकी स्थिति को मजबूत कर सकती है, जिससे गुट को टीएमसी के चुनाव चिन्ह पर दावा करने का मौका मिल सकता है.

—- समाप्त —-

Get $10 by answering a Simple Survey. Click Here