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ललित मोदी बोले- मैं भगोड़ा नहीं, दुनिया घूम रहा हूं:सरकार के हाथ बहुत लंबे, उससे पंगा नहीं ले सकते; मेरे खिलाफ कोई केस नहीं
नई दिल्ली5 घंटे पहले
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आईपीएल फाउंडर ललित मोदी ने गुरुवार को न्यूज एजेंसी ANI को करीब एक घंटा 45 मिनट का इंटरव्यू दिया।
IPL के पूर्व चेयरमैन ललित मोदी ने कहा कि मेरे लिए भगोड़े शब्द का इस्तेमाल मीडिया की तरफ से किया गया। मेरे खिलाफ आज तक कोई केस नहीं है।
न्यूज एजेंसी ANI को गुरुवार को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि मैं बिल्कुल भी नहीं भाग रहा हूं। मैं पूरी दुनिया में घूम रहा हूं। अगर मैं भाग रहा होता, तो आप मुझे कहीं न कहीं पकड़ ही लेते। भारत सरकार की पहुंच बहुत लंबी है। आप भारत सरकार से पंगा नहीं ले सकते। और मेरा ऐसा कोई इरादा भी नहीं है।
IPL को लेकर उन्होंने कहा कि मैं इसको लेकर हमेशा से पैशनेट रहा। आखिरकार IPL मेरे बच्चे जैसा है। मैं भले ही उससे जुड़ा हूं या नहीं, मुझे फर्क नहीं पड़ता। मेरे पिता अच्छे बिजनेसमैन थे, लेकिन आज मेरे परिवार को ललित मोदी की वजह से जाना जाता है।

अब पढ़िए इंटरव्यू में ललित मोदी से सवाल-जवाब
सवाल: आप IPL लेकर आए, उसे फेमस किया और गायब हो गए। इसके बारे में क्या सोचते हैं?
जवाब: मैं आज भी मैच देखता हूं। मैं इसे लेकर हमेशा से पैशनेट रहा हूं। IPL मेरे बच्चे जैसा है। मैं उससे जुड़ा हूं या नहीं, इससे मुझे फर्क नहीं पड़ता। मेरे पिता अच्छे बिजनेसमैन थे, लेकिन आज मेरे परिवार को ललित मोदी की वजह से जाना जाता है। मैं कहीं जाता हूं तो लोग मुझे जानते हैं। यह सब IPL की वजह से हुआ।
सवाल: आपने भारत की ज्यूडिशियरी के बारे में काफी बातें की हैं। आपके लिए भगोड़े शब्द का इस्तेमाल होता है। इस बारे में क्या कहेंगे?
जवाब: मैं बिल्कुल भी नहीं भाग रहा हूं। मैं पूरी दुनिया में घूम रहा हू। अगर मैं भाग रहा होता, तो आप मुझे कहीं न कहीं पकड़ ही लेते। भारत सरकार की पहुंच बहुत लंबी है। आप सरकार से पंगा नहीं ले सकते। और मेरा ऐसा कोई इरादा भी नहीं है।
हमारे देश में कभी सुनवाई होती ही नहीं है। न्याय मिलता तो है, लेकिन इसमें बहुत देर लग जाती है। देर से मिलने वाला न्याय भी एक तरह की सजा ही है। मेरे खिलाफ एक भी मामला दर्ज नहीं हुआ है अगर मैं इतना ही बुरा हूं तो ठीक है, भाई लोगो, जाओ और मुझ पर मुकदमा चलाओ।
सवाल: क्या ललित मोदी अपना नाम बेदाग करने के लिए भारत लौटने की योजना बना रहे हैं?
जवाब: नहीं, अब मेरी प्राथमिकताएं बदल गई हैं। अब खुद को सही साबित करने की चाहत खत्म हो चुकी है। एक समय था, जब मैं सच में वापस आना चाहता था और मेरे पास वापस आने के सभी कारण भी थे। लेकिन अब वापस आकर क्या करूंगा।
अगर आप मुझे गिरफ्तार करना चाहते हैं, तो आपको मुझे कोर्ट ले जाना होगा। 17 साल हो गए, आप मुझे कोर्ट नहीं ले जाए पाए। तो अचानक आज आप मुझे कैसे अरेस्ट कर सकते हैं? अगर कुछ होता, तो अब तक सामने आ गया होता।

सवाल: कांग्रेस के सीनियर लीडर रहे पी चिदंबरम से आपका क्या विवाद हुआ था?
जवाब: जिन लोगों के पास राजनीतिक रसूख है, जिनके अपने निजी स्वार्थ हैं, वही लोग मेरे खिलाफ विवाद खड़ा करने के लिए जिम्मेदार हैं। मुझे कानून से डर नहीं लगता। मुझे जिस बात का डर है, वह यह कि कुछ लोग हैं जो राजनीति से जुड़े हैं। चाहे वे विपक्ष में बैठते हों या कहीं और, उनकी मेरे खिलाफ कोई न कोई खुन्नस है। उनका काफी दबदबा भी है। इसलिए उन्होंने माहौल खराब कर दिया।
शुरुआत में मेरे हर सरकार के साथ दोस्ताना व्यवहार थे, लेकिन स्थिति तब बिगड़ गई, जब कांग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार ने 2009 के आम चुनावों का हवाला देते हुए टूर्नामेंट के लिए सुरक्षा देने से इनकार कर दिया।
तब IPL को दक्षिण अफ्रीका ले जाने से पहले हमने शेड्यूल में 154 बार बदलाव किया। और फिर आखिरकार मिस्टर चिदंबरम का फरमान आया। उस समय वे गृह मंत्री थे। वे बहुत ज्यादा ताकतवर थे। कांग्रेस सरकार ने कहा था कि वे कांग्रेस-शासित राज्यों में अनुमति नहीं देंगे। बस यहीं से संबंध बिगड़ना शुरू हुए।
सवाल: साउथ अफ्रीका से लौटने के बाद 2009 में शशि थरूर, सुनंदा पुष्कर और कोच्चि IPL फ्रेंचाइजी से जुड़ा विवाद क्या था?
जवाब: 2010 में कोच्चि टस्कर्स IPL फ्रेंचाइजी को लेकर काफी विवाद हुआ था। दरअसल मैंने टीम को खरीदने वाले मालिकों के समूह पर सवाल उठाए थे। इसमें शशि थरूर की दिवंगत पत्नी, सुनंदा पुष्कर से जुड़ा एक कथित तौर पर धोखाधड़ी वाला इक्विटी ढांचा शामिल था। उस समय की सत्ताधारी UPA सरकार की पूरी मशीनरी मुझे गिराने के लिए एकजुट हो गई।
शशि थरूर को सोनिया गांधी का सपोर्ट था। मुझ पर हर तरफ से हमले हो रहे थे। उन दिनों मुझे अहमद पटेल के फोन आए। मुझे प्रणब मुखर्जी के फोन आए। मैं उन सभी का दोस्त था। राजीव शुक्ला मेरे पास आते थे और मुझसे कहते थे, यह करो, वह करो।
बेंगलुरु में देर रात हुई एक मीटिंग के दौरान मैंने फ्रेंचाइजी समझौते पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया। मैं जानता था कि कंपनी में ‘शैडो शेयरहोल्डर्स’ (छिपे हुए शेयरधारक) कौन हैं।
मुझे जरा भी अंदाजा नहीं था कि सुनंदा पुष्कर कौन थीं। मैंने टीम के सह-मालिकों से पूछा कि यह महिला कौन है? एक आदमी ने कहा कि वह एक ऑटोमोबाइल डीलर की बेटी हैं और एक मशहूर मार्केटिंग प्रोफेशनल हैं। मैंने कहा, ‘अरे, मैं भी भारत में एक मार्केटिंग प्रोफेशनल हूं और मुझे नहीं पता कि वह कौन हैं।

तभी मुझे शशि थरूर का कॉल आया। उन्होंने कहा, ‘ललित, सुनंदा पुष्कर के बारे में मत पूछो। वह मेरी बहुत अच्छी दोस्त हैं।’ मैंने पूछा, ‘क्यों?’ तो उन्होंने कहा, ‘अगर तुमने पूछा, तो मैं सुबह तुम्हारे यहां छापा पड़वा दूंगा।’ तभी मैंने कहा, ‘भाड़ में जाओ। तुम खुद को समझते क्या हो? तुम भले ही भारत के विदेश मंत्री हो, लेकिन दोबारा कभी मुझसे ऐसी बात कहने की हिम्मत मत करना। मैंने जोर से फोन पटक दिया और कहा कि मैं साइन नहीं करूंगा। हालांकि, बाद में तत्कालीन BCCI अध्यक्ष शशांक मनोहर ने देर रात फोन करके जबरदस्ती साइन करने पर मजबूर किया।
सवाल: कपिल सिब्बल ने एक बार कहा था कि आपके नरेंद्र मोदी से अच्छे संबंध है, वे उस वक्त गुजरात के सीएम थे। क्या आपने कांग्रेस से निपटने के लिए उनकी मदद ली है?
जवाब: मिस्टर मोदी क्रिकेट के बहुत बड़े फैन हैं। उनके साथ मेरी जितनी भी बातचीत हुई, वह सिर्फ क्रिकेट को लेकर थी। वे अहमदाबाद में क्रिकेट लाना चाहते थे। देखिए अब यहां दुनिया का सबसे बेहतरीन स्टेडियम बना है।
सवाल: जब आपने भारत छोड़ा तो आपने कहा था कि आपको दाऊद इब्राहिम से धमकी मिल रही है? ऐसा क्यों हुआ था?
जवाब: दाऊद इब्राहिम एक जाना-माना बुकी है। वह क्रिकेट के सट्टे को कंट्रोल करता था। उन दिनों 2 अरब डॉलर का अवैध सट्टा होता था। आज एक मैच में 4 अरब डॉलर का अवैध सट्टा होता है। यह बहुत बड़ा है। यह इतना बड़ा है, जिसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते। हर गेंद पर सट्टे का एक मौका होता है। यही सट्टा बाजार है। अब कोई पूरे मैच को फिक्स नहीं करता। आप ओवर फिक्स करते हैं। आप गेंद फिक्स करते हैं।
हमें पता ही नहीं चलता कि फिक्सिंग कब हो गई। यह इतना पेचीदा हो गया है। कोई रूमाल निकालता है, कोई किसी चीज को दूसरी तरफ से रगड़ता है और यही एक इशारा होता है।
अगर आप शुरुआती तीन साल देखें, जब मैंने IPL चलाया था, तो उस समय कोई फिक्सिंग नहीं हुई थी। मैंने बहुत से लोगों के आने पर रोक लगा दी थी। माफिया को यह बात पसंद नहीं आई। उन्होंने मुझे आंख मूंद लेने के लिए करोड़ों डॉलर की पेशकश की थी।
(2012 की घटनाओं को याद करते हुए) लंदन में बैठे एक फिक्सर ने ‘बाबा’ नाम के एक रसूखदार बिचौलिए के पेंटहाउस में देर रात एक मीटिंग का इंतजाम करवाया था। इस मीटिंग के दौरान, बिचौलिए ने कथित तौर पर अपने टैरेस से एक सैटेलाइट फोन के जरिए सीधे दाऊद इब्राहिम को फोन किया और स्पीकर ऑन कर दिया, ताकि वे मुझ पर दबाव डालकर सिंडिकेट के लिए एक IPL फ्रेंचाइजी दिलवाई जा सके। हालांकि, मैंने मना कर दिया था। इसके बाद मेरी जान लेने की तीन बार कोशिश भी हुई।
माफिया लोगों के साथ मेरा मसला तब शांत हुआ, जब सिंडिकेट के एक बड़े गुर्गे छोटा शकील ने एक लाइव इंटरव्यू देकर इस बात की पुष्टि की कि माफिया ने ललित मोदी के साथ अपने सारे मसले सुलझा लिए हैं। जब उनसे पूछा गया कि आखिर क्या सुलझा तो ललित ने साफ किया कि यह मेरी अपनी निजी गारंटी थी कि इस खेल से पूरी तरह से दूर हो जाऊंगा, जिसने मेरी जान बचाई।
सवाल: आपने एक बार अपनी बॉयोपिक के बारे में बात की थी। क्या इस पर काम जारी है?
जवाब: हां, (बायोपिक पर काम चल रहा है)। अभी इसकी स्क्रिप्ट लिखी जा रही है। रणवीर मेरा किरदार निभाना चाहते हैं। वह मुझसे मिलने आए थे। मैं चाहूंगा कि वही यह किरदार निभाएं, अगर उनके पास समय हो तो, क्योंकि अब वह बहुत बड़े स्टार बन गए हैं। मैं रणवीर को नहीं जानता था। मैं दीपिका को बहुत अच्छी तरह जानता था। मैं रणवीर से कभी नहीं मिला था। एक दिन मुझे फोन आया कि रणवीर मुझसे मिलना चाहते हैं। और कुछ साल पहले, करीब दो साल पहले, वह मुझसे मिलने लंदन आए थे।
सवाल: टी-20 का शुरुआती दौर, फिर बदलाव को कैसे देखते हैं। वैभव सूर्यवंशी को लेकर क्या कहेंगे?

जवाब: 2007 टी-20 वर्ल्डकप में कई सीनियर भारतीय खिलाड़ी नहीं खेलना चाहते थे। दरअसल भारत का इंग्लैंड दौरा 19 जुलाई से 8 सितंबर 2007 तक चला था। इसमें तीन टेस्ट मैचों की सीरीज और सात वनडे मैचों की सीरीज शामिल थी। इसके ठीक कुछ दिनों बाद ही, 11 सितंबर को वर्ल्डकप शुरू होना था।
भारतीय टीम के इंग्लैंड दौरे के दौरान मैं ड्रेसिंग रूम में मौजूद हर खिलाड़ी के पास गया था। मैंने उनके पास जाकर कहा, ‘प्लीज, मैं आपसे मिन्नत करता हूं कि आप T20 खेलें।’ इस पर उन्होंने कहा, ‘ललित, क्या तुम मजाक कर रहे हो? यह कैसा बेवकूफी भरा खेल है? हम इसे नहीं खेलना चाहते।’ ड्रेसिंग रूम में मौजूद हर खिलाड़ी ने मुझसे यही बात कही थी। अब स्थिति बदल गई है। अब सभी खिलाड़ी इस फॉर्मेट का हिस्सा बनना चाहते हैं।

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