पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर जनसुराज पार्टी की ओर से प्रशांत किशोर उम्मीदवार होंगे। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने इसकी घोषणा की है।
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प्रशांत किशोर ने कहा, “चार सालों से जन सुराज ही मेरी जिंदगी है। पार्टी ने मुझे जो जिम्मेदारी दी है, उसे पूरा करने का प्रयास करूंगा। बांकीपुर से अगर जीत मिलती है तो उससे पार्टी का मनोबल काफी बढ़ेगा और पार्टी आगे बढ़ेगी।”
बता दें नितिन नवीन के राज्यसभा सांसद बनने के बाद से ही पीके के बांकीपुर से चुनाव लड़ने की चर्चा थी। पिछले दिनों खुद पीके ने कहा था- अगर मेरे चुनाव लड़ने से भाजपा बांकीपुर जैसी मजबूत सीट हारती है, तो मैं चुनाव लड़ने के लिए तैयार हूं।

‘बिहार में जब तक परिवर्तन नहीं आता, तब तक संघर्ष करता रहूंगा’
प्रशांत किशोर ने कहा कि मैं पार्टी कार्यकर्ता वरिष्ठ नेता और बिहार की जनता को आभार व्यक्त करता हूं कि उन्होंने इतनी बड़ी जिम्मेदारी मेरे कंधे पर रखी है। बांकीपुर में चुनाव लड़ने की जो जिम्मेदारी मुझे दी गई है, उसे मैं पूरी तरह से निभाऊंगा। अगले 5 वर्षों में बिहार में जब तक परिवर्तन नहीं आता, तब तक मैं संघर्ष करता रहूंगा।
प्रशांत किशोर ने कहा कि नवंबर 2025 में जिन मतदाताओं ने जनसुराज की वोट दिया, उन सबको मैं धन्यवाद देता हूं। बांकीपुर की जनता से मैं वादा करता हूं कि मैं पूरी ईमानदारी के साथ काम करूंगा। मैं आपको आश्वस्त करता हूं कि अगर आप अपना जनप्रतिनिधि बनाकर जनसुराज के प्रतिनिधि को भेजते हैं तो वह 242 विधायकों पर भारी पड़ेगा।

प्रशांत किशोर ने उपचुनाव लड़ने की घोषणा के बाद पटना जंक्शन स्थित महावीर मंदिर पहुंचकर पूजा अर्चना की।
PK ने सम्राट चौधरी पर साधा निशाना
प्रशांत किशोर ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि, ‘वह पिछले दरवाजे से मुख्यमंत्री बने हैं। वह एक सिलेक्टेड मुख्यमंत्री है। उनका भी चाल चरित्र और चेहरा जल्द ही सामने आ जाएगा।
मैं बेहतर हूं या खराब हूं, यह तय जनता को करना है। बांकीपुर की जनता से मैं अपील करता हूं कि आप केवल एक ईमानदार और अच्छे प्रत्याशी को अपना नेता चुनें। इस सीट से बिहार की सरकार नहीं बदलेगी। बल्कि बिहार की राजनीति बदलेगी। यह बिहार को एक नया विकल्प देने का चुनाव। बांकीपुर के चार लाख मतदाताओं से मैं समर्थन मांग रहा हूं।’
BJP से ये हो सकते हैं उम्मीदवार
भाजपा ने अभी अपने उम्मीदवार के नाम की घोषणा नहीं की है। हालांकि, सूत्रों की मानें तो नील रतन घोष का नाम लगभग फाइनल है।
1.नील रतन घोष: बीजेपी ने उम्मीदवार चुनने में उनकी पसंद का ख्याल रखा है। स्थानीय कार्यकर्ताओं की मांग पर नील रतन घोष (नीलू दा) को टिकट मिल सकता है। भाजपा के पुराने कार्यकर्ता हैं।
नितिन नवीन के साथ लंबे समय रहे हैं। उनके विश्वासी हैं। नितिन नवीन भी इन्हें सम्मान देते हैं। पर्दे के पीछे से नितिन नवीन का पूरा काम संभाल रहे थे। नीलू मंदिरी के रहने वाले हैं,मूल रूप से पश्चिम बंगाल के हैं।

रेस में इनके भी नाम
2. अजय आलोक
नेशनल मीडिया में भाजपा के मजबूत चेहरे के रूप में पहचाने जाने वाले अजय आलोक को भी बांकीपुर में नितिन नवीन के उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जा रहा है।
कायस्थ जाति से आने वाले डॉ. आलोक के पिता पद्म श्री गोपाल प्रसाद सिन्हा बड़े डॉक्टर हैं। पटना में इनकी एक अलग छवि है। 2003 में अपना पॉलिटिकल करियर शुरू करने वाले आलोक ने 2005 में कैमूर के चैनपुर विधानसभा सीट से LJP के टिकट पर चुनाव लड़ा था।
2010 के चुनाव में भी इन्होंने इसी सीट से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा। वे दोनों चुनाव हार गए। इसके बाद 2012 में जदयू जॉइन किया। पार्टी के प्रवक्ता और महासचिव बने। 2023 में जदयू से इस्तीफा देकर BJP का दामन थामा। फिलहाल BJP के राष्ट्रीय मीडिया का मुखर चेहरा हैं।

3. रणवीर नंदन
भाजपा नेता रणवीर नंदन धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष हैं। इनके नाम की भी चर्चा बांकीपुर सीट के लिए है। रणवीर शिक्षित और सौम्य क्षवि के नेता माने जाते हैं। कायस्थ जाति से आते हैं। पटना के ही रहने वाले हैं।
प्रो. रणवीर नंदन कभी नीतीश कुमार के भरोसेमंद माने जाते थे। 2014 में नीतीश ने इन्हें पहली बार अपनी पार्टी के कोटे से विधान परिषद भेजा था। 2020 में कार्यकाल पूरा होने के बाद पार्टी की तरफ से इन्हें रिपीट नहीं किया गया। इसके बाद उन्होंने सितंबर 2023 में जेडीयू से इस्तीफा दे दिया था।
जानिए क्यों बांकीपुर से चुनाव लड़ने जा रहे हैं प्रशांत किशोर
1. पार्टी और अपनी विश्वसनीयता बढ़ाना
2025 बिहार विधानसभा चुनाव जन सुराज पार्टी के लिए एक बड़ा रियलिटी चेक था। 2 अक्टूबर 2024 को पार्टी के औपचारिक गठन के बाद प्रशांत किशोर ने कड़ी मेहनत की। गांव-गांव घूमे। बड़ी उम्मीदों के साथ उन्होंने 243 में से 238 सीटों पर उम्मीदवार उतारे।
हालांकि, चुनाव परिणामों में जन सुराज एक भी सीट जीतने में नाकाम रही। सिर्फ एक सीट मढ़ौरा में दूसरे नंबर पर रही। पार्टी का वोट शेयर 3.4% रहा। यानी 16,77,583 वोट मिले।
इस करारी हार के बाद जन सुराज के वजूद और क्रेडिबिलिटी (विश्वसनीयता) पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।
विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर ने तेजस्वी यादव की सीट राघोपुर से चुनाव लड़ने का ऐलान किया था, लेकिन बाद में हट गए थे। नहीं लड़े। इसकी खूब किरकिर हुई।
अब बांकीपुर से चुनाव लड़कर प्रशांत किशोर लोगों को मैसेज देंगे कि पार्टी प्रयोग के दौर से बाहर निकल गई है। बिहार छोड़कर भागे नहीं हैं।
प्रशांत किशोर मजबूत फाइट देते हैं या जीतते हैं तो यह साबित होगा कि जन सुराज सिर्फ कागजी या डिजिटल पार्टी नहीं है, बल्कि जमीन पर टिकने वाली राजनीतिक ताकत है।
PK पर अक्सर आरोप लगता है कि वे सिर्फ बैकस्टेज रणनीतिकार हैं और खुद चुनावी राजनीति से बचते हैं। खुद चुनाव लड़कर वे इस छवि को तोड़ेंगे और जनता के बीच अपनी गंभीरता साबित करेंगे।

2. वैकल्पिक राजनीति का लिटमस टेस्ट
प्रशांत किशोर अपनी पदयात्रा के समय से ही ‘राइट टू एजुकेशन’ और ‘बिहार के बच्चों को बिहार में ही रोजगार’ देने का नैरेटिव सेट कर रहे हैं। साथ ही पारंपरिक जातिगत राजनीति को नकारने का दावा करते हैं।
बांकीपुर जैसे पढ़े-लिखे और शहरी क्षेत्र में उनकी इस नई सोच का असली लिटमस टेस्ट होगा कि क्या शहरी मतदाता पारंपरिक पार्टी लाइन से अलग हट सकता है।
बांकीपुर पूरी तरह से पटना नगर निगम का एक कोर शहरी इलाका है। यहां ग्रामीण क्षेत्रों जैसी पारंपरिक जातिगत गोलबंदी (जैसे यादव-कुर्मी या ठेठ महादलित समीकरण) उतनी हावी नहीं होती, जितनी ‘क्लास और अवेयरनेस’ की राजनीति होती है।
यहां की आबादी में उच्च मध्यम वर्ग, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, डॉक्टर्स, लॉयर्स और बड़े कारोबारी (वैश्य और सवर्ण) शामिल हैं।
3. BJP के गढ़ में सेंध लगाकर तीसरा विकल्प बनना
बांकीपुर BJP का मजबूत किला है। 1995 से यहां भाजपा चुनाव नहीं हारी है। यहां जीत या अच्छा मुकाबला प्रशांत किशोर को BJP-विरोधी तीसरा विकल्प के रूप में स्थापित करेगा।
प्रशांत किशोर जानते हैं कि अगर वे RJD या JDU के गढ़ में लड़ेंगे तो उन्हें सीधे जातिगत अभेद्य दीवारों (जैसे यादव या कुर्मी-कोइरी ब्लॉक) का सामना करना पड़ेगा, जिसे तोड़ना अभी मुश्किल है।
बांकीपुर में BJP का वोटर ‘मोदी लहर’ और ‘राष्ट्रवाद’ के कारण बंधा है। यदि वह वोटर स्थानीय स्तर पर BJP से थोड़ा भी नाराज होगा तो वह RJD को वोट देने की बजाय प्रशांत किशोर जैसे एक पढ़े-लिखे विकल्प को चुनना पसंद कर सकता है।
महागठबंधन (RJD-कांग्रेस) बांकीपुर में खुद को बेहद कमजोर स्थिति में पाता है। ऐसी स्थिति में भाजपा को हराने के लिए विपक्ष अंदरूनी तौर पर प्रशांत किशोर को वॉकओवर दे सकता है या अपने कैडर वोटर (अल्पसंख्यक और यादव मतदाता, जो करीब 60,000 हैं) को PK की तरफ शिफ्ट करवा सकता है।

बांकीपुर का जातीय समीकरण क्या है?
पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट को बिहार की सबसे हाई-प्रोफाइल और ‘VIP’ शहरी सीटों में गिना जाता है। चुनाव आयोग के मुताबिक, इस विधानसभा सीट पर कुल मतदाताओं की संख्या 3,79,420 है।
आधिकारिक चुनावी विश्लेषणों और मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक…
- कायस्थ वोटर (सबसे निर्णायक): इसे पारंपरिक रूप से कायस्थ बहुल सीट माना जाता है। इस समाज के वोटरों की संख्या सबसे अधिक करीब 70,000 है। इसी कारण बीजेपी 1995 से यहां इसी समाज के उम्मीदवार (पहले नवीन किशोर सिन्हा और बाद में उनके बेटे नितिन नवीन) को उतारती आई है। और जीतती आई है।
- भूमिहार, ब्राह्मण, राजपूत: कायस्थों के अलावा यहां भूमिहार, ब्राह्मण और राजपूत मतदाताओं की भी बड़ी आबादी है। कुल मिलाकर फॉरवर्ड मतदाता यहां की राजनीति की दिशा तय करते हैं।
- यादव और OBC: कुछ पॉश सोसाइटियों और वार्डों में यादव, वैश्य और कुर्मी मतदाताओं की भी अच्छी-खासी संख्या है। स्थानीय विश्लेषकों के मुताबिक, कायस्थों के बाद संख्या बल में यादव समाज अहम भूमिका निभाता है।
- मुस्लिम मतदाता: इस सीट पर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या करीब 30 हजार से अधिक है।
- अनुसूचित जाति (SC): दलित और महादलित मतदाताओं की संख्या करीब 31 हजार के आसपास है।
प्रशांत किशोर के जीतने की कितनी संभावना है?
फैक्ट्स और आंकड़ों की एनालिसिस करें तो प्रशांत किशोर के जीतने की राह काफी मुश्किल है, लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों में वे उलटफेर भी कर सकते हैं।
- बांकीपुर सिर्फ बीजेपी की सीट नहीं है, बल्कि यहां बीजेपी का सबसे मजबूत सुपर स्ट्रॉन्ग होल्ड है।
- 2020 चुनाव में BJP के नितिन नवीन को 59.6% वोट मिले। कांग्रेस के लव सिन्हा (शत्रुघ्न सिन्हा के बेटे) को महज 31.6% वोट मिला। मार्जिन 39,000+ वोटों का था।
- 2025 चुनाव में नितिन नवीन ने इस गढ़ को और मजबूत करते हुए 98,299 वोट (63.25%) हासिल किए। RJD की रेखा कुमारी को 29.83% वोट मिले।
- वहीं, 2025 बिहार विधानसभा चुनाव में जन सुराज की उम्मीदवार वंदना कुमारी को मात्र 4.97% मिले थे।
- प्रशांत किशोर के खुद चुनाव लड़ने पर वोट बैंक जरूर बढ़ेगा, लेकिन 5% वोट शेयर को रातों-रात 45% या 50% के विनिंग मार्क तक ले जाना बड़ा चमत्कार ही होगा।
- बांकीपुर पटना का पढ़ा-लिखा, व्यापारी और सवर्ण बहुल इलाका है। यह वर्ग स्थानीय मुद्दों से ज्यादा केंद्र सरकार, PM नरेंद्र मोदी के चेहरे और ब्रांड बीजेपी के प्रति वफादार रहता है।
हालांकि, अगर प्रशांत किशोर इस मुकाबले को त्रिकोणीय से आमने-सामने की लड़ाई में बदलने में कामयाब होते हैं, तो उनकी संभावना बढ़ सकती है। इसके लिए 3 फैक्टर काम करेंगे…
1. महागठबंधन का ‘टैक्टिकल वॉकओवर’
बांकीपुर में RJD या कांग्रेस जानती है कि वे अकेले दम पर BJP को नहीं हरा सकते।
अगर महागठबंधन परदे के पीछे से प्रशांत किशोर को इन डायरेक्ट समर्थन दे दे और अपना उम्मीदवार कमजोर उतारे, तो महागठबंधन का पारंपरिक करीब 30% वोट बैंक सीधे PK के खाते में ट्रांसफर हो सकता है।
2. सवर्ण और युवा वोट बैंक में सेंधमारी
अगर बीजेपी के नए स्थानीय उम्मीदवार को लेकर एंटी-इन्कंबेंसी (नाराजगी) होती है, तो PK इसका फायदा उठा सकते हैं।
बांकीपुर में करीब 1.10 लाख से अधिक युवा वोटर (18-34 आयु वर्ग) हैं। PK का ‘बिहार में रोजगार’ और ‘भविष्य का बदलाव’ वाला नैरेटिव अगर इस युवाओं और BJP के पारंपरिक वोट बैंक में 20 से 25% की भी सेंधमारी कर देता है, तो मुकाबला बराबरी पर आ जाएगा।
3. PK का खुद का सेलिब्रिटी और ब्रांड स्टेटस
2025 विधानसभा चुनाव में जन सुराज की प्रत्याशी वंदना कुमारी को 7,717 वोट मिले थे, क्योंकि वे स्थानीय चेहरा थीं। लेकिन जब प्रशांत किशोर खुद लड़ेंगे, तो पूरी पार्टी की ताकत, असीमित संसाधन, और मीडिया का पूरा फोकस इसी एक सीट पर आ जाएगा।
वे इस चुनाव को ‘बिहार का भविष्य बनाम पुराना ढर्रा’ बनाकर एक नया नैरेटिव खड़ा कर सकते हैं, जो न्यूट्रल वोटर्स को खींच सकता है।
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पटना के बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने जा रहा उपचुनाव भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल है। जन सुराज पार्टी के के अंदर बहुत मजबूती से तैयारी चल रही है कि प्रशांत किशोर खुद चुनावी मैदान में उतरें। सूत्रों के अनुसार ये लगभग फाइनल भी हो चुका है।
चूंकि यह सीट BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की है, इसलिए प्रशांत किशोर यहां से पूरे देश को मैसेज देना चाहते हैं। उनकी इस इच्छा को पूरी करने में महागठबंधन भी अहम भूमिका निभा सकता है। पूरी खबर पढ़ें…
