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TMC में टूट का संसद पर असर:NDA को फायदा हो सकता है, राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत से सिर्फ 16 सीट दूर

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नई दिल्ली/कोलकाता2 घंटे पहले

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राज्यसभा और लोकसभा दोनों सदनों में NDA की सीटें बढ़ सकती हैं। - Dainik Bhaskar

राज्यसभा और लोकसभा दोनों सदनों में NDA की सीटें बढ़ सकती हैं।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) में बगावत से संसद में NDA की ताकत अब और बढ़ सकती है। TMC के 20 बागी सांसदों के समर्थन के बाद लोकसभा में NDA की संख्या 294 से बढ़कर 314 तक पहुंच सकती है।

18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव और TMC सांसदों के संभावित इस्तीफों के बाद उच्च सदन में NDA का आंकड़ा 148 से बढ़कर 154 तक पहुंचने की संभावना है। हालांकि दो-तिहाई बहुमत तक पहुंचने के लिए NDA को लोकसभा में 46 और राज्यसभा में 9 सीटों की जरूरत रहेगी।

उधर, कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोमवार को दावा किया, ‘गृहमंत्री अमित शाह ने इन सांसदों के गैर-कानूनी तौर पर अलग होने की साज़िश रची थी। यह अजीब कदम लोकसभा में NDA के लिए दो-तिहाई बहुमत हासिल करने की उनकी रणनीति का हिस्सा है।’

दरअसल, बजट सत्र के दौरान सरकार परिसीमन बिल के लिए संविधान संशोधन बिलों को लोकसभा में पास नहीं करा पाई थी। भाजपा की इन कोशिशों को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है।

सीटों के गणित से समझिए… NDA की अभी मौजूदा स्थिति क्या है?

लोकसभा में NDA 314 पर पहुंच जाएगी

  • लोकसभा में NDA के पास फिलहाल 294 सांसद हैं। TMC के 20 बागी सांसदों ने NCPI में विलय कर लिया है। उन्होंने NDA को समर्थन देने की बात कही है। इससे NDA सांसदों की संख्या 314 तक पहुंच जाएगी।
  • फिलहाल लोकसभा की 543 में से 3 सीटें खाली हैं। ऐसे में सदन की प्रभावी संख्या 540 है और दो-तिहाई बहुमत के लिए 360 सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी। ऐसे में NDA को दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा हासिल करने के लिए और 46 सांसदों की जरूरत होगी।

राज्यसभा में NDA की संख्या 154 तक पहुंच सकती है

  • राज्यसभा में NDA के पास 148 सांसद हैं। 18 जून को झारखंड और मिजोरम की राज्यसभा सीटों पर चुनाव होने हैं। इन चुनावों और कुछ निर्दलीय सदस्यों के समर्थन से NDA की संख्या 151 तक पहुंच सकती है।
  • TMC के 3 राज्यसभा सांसदों के इस्तीफे से पश्चिम बंगाल में 3 सीटें खाली होंगी। मौजूदा राजनीतिक हालात में इन सीटों पर NDA समर्थित उम्मीदवारों की जीत की संभावना है। ऐसा होने पर गठबंधन की संख्या 154 तक पहुंच सकती है।
  • राज्यसभा में कुल 245 सदस्य हैं। दो-तिहाई बहुमत के लिए 163 सांसदों की जरूरत होती है। यानी NDA इस संख्या से सिर्फ 9 सीट पीछे रहेगा। अगर TMC के और राज्यसभा सांसद इस्तीफा देते हैं तो गठबंधन यह आंकड़ा भी हासिल कर सकता है।
  • हालांकि NDA के सामने आगे चुनौती भी है। नवंबर में उत्तर प्रदेश से 10 राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल खत्म हो रहा है। विधानसभा में मजबूत स्थिति के कारण समाजवादी पार्टी अपनी सीटें बढ़ा सकती है, जिससे राज्यसभा का समीकरण बदल सकता है।

राज्यसभा में INDIA ब्लॉक 64 सीटों पर

राज्यसभा में INDIA ब्लॉक के पास फिलहाल 64 सांसदों का समर्थन बताया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के TVK को समर्थन देने से DMK नाराज है और उसने गठबंधन से दूरी बना ली है। वहीं, आम आदमी पार्टी (AAP) भी INDIA ब्लॉक से अलग हो चुकी है।

वहीं, YSRCP, BJD और MDMK जैसे क्षेत्रीय दलों के पास भी पर्याप्त संख्या में सांसद हैं। किसी करीबी मतदान की स्थिति में इन दलों की भूमिका अहम हो सकती है।

NDA को संसद में दो-तिहाई बहुमत क्यों चाहिए?

संसद में दो-तिहाई बहुमत होने से सरकार कुछ ऐसे बड़े फैसले ले सकती है, जिनके लिए साधारण बहुमत काफी नहीं होता। खासकर संविधान संशोधन जैसे मामलों में इसकी जरूरत पड़ती है।

  • संविधान संशोधन आसान होगा- संविधान के अधिकांश संशोधनों के लिए दोनों सदनों में मौजूद और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई समर्थन के साथ कुल सदस्य संख्या के बहुमत की जरूरत होती है।
  • राज्यसभा पर निर्भरता घटेगी- अगर NDA के पास दोनों सदनों में मजबूत बहुमत होता है, तो उसे विपक्षी दलों के समर्थन की कम जरूरत पड़ेगी।
  • बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक सुधार- चुनाव सुधार, न्यायिक सुधार, प्रशासनिक ढांचे में बदलाव जैसे बड़े विधायी कदम उठाना आसान हो सकता है।
  • संविधान से जुड़े विवादित फैसलों को आगे बढ़ाने की क्षमता- ऐसे मुद्दे जिनमें संवैधानिक संशोधन जरूरी हो, उन पर सरकार ज्यादा आसानी से आगे बढ़ सकेगी।
  • संयुक्त सत्र की जरूरत कम- विधेयकों को पारित कराने के लिए बार-बार राजनीतिक सहमति जुटाने की जरूरत कम हो सकती है।

लोकसभा में 54 वोट से गिरा था परिसीमन बिल

लोकसभा में 16 अप्रैल 2026 को सीटें बढ़ाने के लिए लाया गया संविधान का 131वां संशोधन बिल लोकसभा में गिर गया था। लोकसभा में बिल पर 21 घंटे की चर्चा के बाद वोटिंग हुई थी। उपस्थित 528 सांसदों ने वोट डाले। पक्ष में 298, विपक्ष में 230 वोट पड़े।

बिल पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत थी। 528 का दो तिहाई 352 होता है। इस तरह बिल 54 वोट से गिर गया। 12 साल के शासन में यह पहला मौका था, जब मोदी सरकार सदन में कोई बिल पास नहीं करा पाई थी।

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