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Sunday, July 26, 2026
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'LGBTQ समाज का हिस्सा, उन्हें समान सम्मान मिले', बोले मोहन भागवत

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने एलजीबीटीक्यू (LGBTQ) कम्युनिटी को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि एलजीबीटीक्यू के लोग भी समाज का हिस्सा हैं और उन्हें सम्मान के साथ समाज में बराबरी का स्थान मिलना चाहिए. हैदराबाद में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि ऐसे लोग भी हमारे समाज में मौजूद हैं. इनमें से कुछ जन्मजात होती हैं, जिन्हें प्रकृति तय करती है.

मोहन भागवत ने कहा कि ऐसे मामलों में न तो संबंधित व्यक्ति और न ही कोई दूसरा कुछ कर सकता है, क्योंकि वे जन्म से ही ऐसे होते हैं. वहीं, कुछ बाद में मानसिकता या शारीरिक झुकाव के कारण सामने आती हैं. उन्होंने कहा कि जब पूरी दुनिया में ऐसे लोग मौजूद हैं तो यह नहीं कहा जा सकता कि भारत में ऐसा कभी नहीं रहा. हमारे समाज में भी ऐसे लोग पहले से मौजूद रहे हैं और हमारी परंपरा ने उनके अस्तित्व को स्वीकार किया है.

भागवत ने आगे कहा कि कुछ मामलों में बदलाव संभव हो सकता है, लेकिन जहां ऐसा संभव नहीं है, वहां यह समझना जरूरी है कि वे भी इंसान हैं और उन्हें जीने का पूरा अधिकार है. उन्हें समाज से अलग नहीं किया गया, बल्कि सामाजिक जीवन में उनके लिए भी जगह रही है. उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को हीन भावना से नहीं देखा जाना चाहिए.

#WATCH | Hyderabad, Telangana: RSS Chief Mohan Bhagwat says, “LGBTQ+ and all these communities exist. Such tendencies are present in society. Some are innate, determined by nature itself; neither we nor they can do anything about it—that is simply how they were born. However,… pic.twitter.com/zJvTSZDfJk

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— ANI (@ANI) July 26, 2026

RSS प्रमुख ने कहा कि आज भी उनके अपने देवी-देवता और धार्मिक स्थल हैं.उनके महामंडलेश्वर भी हैं, जो कुंभ मेले में हिस्सा लेते हैं. उन्होंने कहा कि हमारे यहां इस मुद्दे को लेकर बेवजह शोर मचाने के बजाय ऐसी व्यवस्था की गई, जिससे समाज उनके प्रति सहानुभूति का भाव रखे. उन्हें समाज से अलग मानने के बजाय अपने ही समाज का हिस्सा मानकर उनके लिए जगह बनाई गई.

माता-पिता को ध्यान देना चाहिए

मोहन भागवत ने नई पीढ़ी और बच्चों की परवरिश को लेकर भी अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि हम नई पीढ़ी में जिन गुणों और संस्कारों को देखना चाहते हैं, उन्हें सबसे पहले हमें खुद अपने जीवन में अपनाना होगा.

उन्होंने माता-पिता से बच्चों को डांटने के बजाय उन्हें समझने और प्यार से बातचीत करने की अपील की. भागवत ने कहा कि बच्चों में अच्छे संस्कार विकसित करने के लिए उनके साथ समझदारी से पेश आना जरूरी है. उन्होंने कहा कि समाज में हम जिस बदलाव की उम्मीद करते हैं,उसकी शुरुआत सबसे पहले खुद से करनी चाहिए. जब व्यक्ति अपने व्यवहार और सोच में बदलाव लाएगा, तभी उसका असर समाज में भी दिखाई देगा.

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