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Tuesday, February 24, 2026
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बिहार में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को चुनाव आयोग ने अपना वोटर आईडी 16 अगस्त तक सरेंडर करने को कहा है। शुक्रवार को लेटर जारी कर चुनाव आयोग ने कहा- ‘आपने 2 अगस्त को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मीडिया को जानकारी दी थी कि आपकी EPIC संख्या-RAB2916120 हमारे डेट

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चुनाव आयोग ने लेटर में लिखा कि जांच के दौरान पाया गया कि आपका नाम मतदान केंद्र, संख्या-204, बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय का पुस्तकालय भवन के क्रमांक-416 पर EPIC संख्या- RAB0456228 से है।

‘विशेष गहन पुनरीक्षण-2025 के दौरान आपने BLO के जरिए जो गणना प्रपत्र जमा किया गया था, उसमें भी EPIC संख्या- RAB0456228 ही रजिस्टर्ड है।’

‘संख्या RAB2916120 वाला EPIC नंबर हमारे डेटा में नहीं मिला। इन सभी फैक्ट्स से लगता है कि EPIC कार्ड संख्या- RAB2916120 फर्जी है। फर्जी सरकारी दस्तावेज बनाना और उपयोग करना कानूनी अपराध है।’

‘आपसे एक बार फिर अनुरोध है कि आपका फर्जी प्रतीत होता EPIC कार्ड निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी के कार्यालय में दिनांक 16.08.2025 दोपहर 5:00 बजे तक जमा कराएं।’

चुनाव आयोग ने लेटर जारी कर तेजस्वी को 16 अगस्त तक वोटर आईडी सरेंडर करने को कहा है।

चुनाव आयोग ने लेटर जारी कर तेजस्वी को 16 अगस्त तक वोटर आईडी सरेंडर करने को कहा है।

तेजस्वी ने कहा था- मेरा और पत्नी का नाम वोटर लिस्ट में नहीं है

2 अगस्त को तेजस्वी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था- मेरा और पत्नी का नाम वोटर लिस्ट से कट गया है। BLO आई थीं और हमारा सत्यापन करके गई हैं। फिर भी मतदाता सूची में नाम नहीं है।’

प्रेस कॉन्फ्रेंस में तेजस्वी यादव ने अपना वोटर आईडी कार्ड जारी किया था। वोटर लिस्ट में अपना नाम देखने के लिए EPIC नंबर डाला, जिसके रिजल्ट में लिखा आया- NO RECORDS FOUND। तेजस्वी ने ये पूरी प्रोसेस स्क्रीन पर दिखाई।

थोड़ी देर बाद DM ने जारी की लिस्ट

पटना DM एस एन त्यागराजन ने थोड़ी देर में लिस्ट जारी कर तेजस्वी के दावे को गलत बताया। उन्होंने बूथ लिस्ट जारी की है, जिसमें 416वें नंबर पर तेजस्वी यादव का नाम, उनकी तस्वीर थी।

DM ने कहा, ‘कुछ समाचार माध्यमों से ये जानकारी मिली है कि तेजस्वी प्रसाद यादव का नाम विशेष गहन पुनरीक्षण के प्रारूप मतदाता सूची में नहीं है। इस बारे में जिला प्रशासन, पटना द्वारा जांच की गई। इसमें पता चला कि नेता प्रतिपक्ष का नाम प्रारूप मतदाता सूची में दर्ज है।’

‘वर्तमान में उनका नाम मतदान केंद्र संख्या 204, बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय का पुस्तकालय भवन, क्रम संख्या 416 पर अंकित है। इससे पहले उनका नाम बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय का पुस्तकालय भवन, मतदान केन्द्र संख्या 171, क्रम संख्या 481 पर दर्ज था।’

पटना DM ने ये लिस्ट जारी की है। इसमें 416 नंबर पर तेजस्वी यादव का नाम है।

पटना DM ने ये लिस्ट जारी की है। इसमें 416 नंबर पर तेजस्वी यादव का नाम है।

तेजस्वी ने पूछा- EPIC नंबर कैसे बदला

पटना DM के लिस्ट जारी करने के बाद तेजस्वी यादव ने कहा था, “सबसे पहली बात तो EPIC नंबर बदलता नहीं, कैसे बदला, क्या बदला। अगर मेरा बदल सकता है तो कितने लोगों का EPIC नंबर बदला होगा… यह वोटरों के नाम काटने की साजिश है।’

‘कई IAS अधिकारी भी X पर पोस्ट कर रहे हैं कि उनके नाम कट गए। चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि बूथ वाइज डेटा दे कि किसकी मृत्यु हो गई है, उनका EPIC नंबर क्या है, उनका बूथ नंबर क्या है। अगर कोई दूसरे राज्य में चला गया है तो उसकी डिटेल दें, आप इसे क्यों छिपा रहे हैं। सवाल ये है कि कितना बड़ा फर्जीवाड़ा हो रहा है।’

दरअसल, प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान तेजस्वी ने जो वोटर आईडी दिखाया था उसका EPIC नंबर RAB2916120 था। चुनाव आयोग ने जिस लिस्ट में तेजस्वी का नाम बताया है उसका EPIC नंबर RAB0456228 है। इसे लेकर तेजस्वी अब फिर सवाल खड़े कर रहे हैं।

ऊपर वाला वोटर ID तेजस्वी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिखाया था। नीचे वाला पटना DM ने जारी किया है। दोनों में EPIC नंबर अलग-अलग है।

ऊपर वाला वोटर ID तेजस्वी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिखाया था। नीचे वाला पटना DM ने जारी किया है। दोनों में EPIC नंबर अलग-अलग है।

तेजस्वी बोले- जिनके नाम कटे, उनकी जानकारी नहीं दी गई

चुनाव आयोग की नई वोटर लिस्ट पर सवाल उठाते हुए नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा था, ‘करीब हर विधानसभा से 20 से 30 हजार नाम काटे गए हैं। कुल 65 लाख के करीब यानी 8.5% के करीब मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं।’

‘चुनाव आयोग जब भी कोई विज्ञापन देता था, तो उसमें बताया जाता था कि इतने शिफ्ट हो गए, इतने लोग मृत हैं और इतने लोगों के दोहरे नाम हैं, लेकिन चुनाव आयोग ने हमें जो सूची उपलब्ध करवाई है, उसमें उन्होंने चालाकी दिखाते हुए किसी मतदाता का पता नहीं दिया।’

‘2 गुजराती जो कहेंगे, आयोग करेगा’

तेजस्वी यादव ने कहा था, ‘चुनाव आयोग धांधली कर रहा है। ये गोदी आयोग बन गया है। बिना राजनीतिक दल को विश्वास में लिए इसे कराया गया। आयोग ने हमारी मांग पर कोई सुनवाई नहीं की।’

‘सुप्रीम कोर्ट के सुझाव की भी अनदेखी की गई। हम लोगों ने शुरू से कहा था कि इसमें गरीबों के नाम कटेंगे। चुनाव आयोग ने इसकी प्रक्रिया पूरी की है।’

आयोग अपनी ही बातों से मुकर गया। कहा गया था कि जिसके नाम कटेंगे उनकी जानकारी दी जाएगी। ये जानकारी चुनाव आयोग को राजनीतिक पार्टियों को देनी थी। शुक्रवार को महागठबंधन का डेलीगेशन चुनाव आयोग गया था, लेकिन कोई जानकारी नहीं दी गई।

तेजस्वी ने आगे कहा, ‘2 गुजराती जो कुछ भी कहेंगे, वह चुनाव आयोग करेगा।’

चुनाव आयोग को तेजस्वी की चुनौती

तेजस्वी ने कहा, ‘अगर चुनाव आयोग ने 65 लाख लोगों के नाम काटे, तो क्या उन लोगों को आयोग की ओर से नोटिस दिया गया। चुनाव आयोग ने क्या इनको समय दिया। चुनाव आयोग टारगेटेड काम कर रहा है।’

’65 लाख लोगों के नाम कटे हैं। सुप्रीम कोर्ट को इस मामले में स्वतः संज्ञान लेकर चुनाव आयोग से जवाब मांगना चाहिए। इस प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर धांधली की गई है।’

‘मैं मुख्य चुनाव आयुक्त को चुनौती देता हूं कि अगर आप में हिम्मत है तो आप बूथ वाइज डेटा दें और जिन लोगों का नाम कटा है, उसमें बताएं कि क्यों कटा है। मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर नियुक्त किए गए ज्ञानेश कुमार गुप्ता से हम जानना चाहते हैं कि वो पारदर्शिता क्यों नहीं रखते।’

बिहार में 65 लाख वोटर्स के नाम कटे हैं

चुनाव आयोग ने बिहार में एक महीने तक चले गहन पुनरीक्षण अभियान (SIR) यानी वोटर वेरिफिकेशन के पहले चरण का डेटा जारी कर दिया है। ड्राफ्ट वोटर्स लिस्ट के मुताबिक, बिहार के नए वोटर लिस्ट में 65 लाख 64 हजार वोटरों के नाम काट दिए गए हैं।

चुनाव आयोग के मुताबिक, ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 7 करोड़ 24 लाख 5 हजार 756 लोगों के नाम हैं। पहले यह आंकड़ा 7 करोड़ 89 लाख थे।

1 अगस्त को जारी आंकड़े में आयोग ने बताया है, ‘22 लाख 34 हजार वोटर का निधन, 36 लाख 28 हजार वोटर स्थायी रूप से दूसरी जगह शिफ्ट हुए हैं। वहीं, 7 लाख एक हजार वोटर का नाम दो जगह था। इस कारण इन लोगों का नाम हटाया गया है।’

चुनाव आयोग के आंकड़े के मुताबिक, मुस्लिम बहुल सीमांचल के 4 जिलों और दरभंगा में 9 लाख 65 हजार वोटरों के नाम कटे हैं। जबकि NDA का मजबूत किला कहे जाने वाले तिरहुत के 6 और दरभंगा के 3 यानी 9 जिलों में कुल 21 लाख 29 हजार वोटरों के नाम कटे हैं।

वहीं, महागठबंधन के मजबूत इलाके पटना और मगध कमिश्नरी के 11 जिलों में 16 लाख 57 हजार वोटरों के नाम लिस्ट में नहीं हैं।

मुस्लिम बहुल जिलों में पटना में सबसे ज्यादा नाम कटे

सबसे ज्यादा वोटरों के नाम कटने वाले जिलों की बात करें तो पटना में 3 लाख 95 हजार और सबसे कम 26 हजार वोटरों के नाम कटे हैं।

मुस्लिम बहुल इलाकों की बात करें तो सबसे ज्यादा किशनगंज में 68 फीसदी आबादी मुस्लिम समुदाय की है। कटिहार में 43 फीसदी, अररिया में 42 फीसदी, पूर्णिया में 38 फीसदी और दरभंगा में 25 फीसदी मुस्लिम आबादी है।

अगर विधानसभावार आंकड़ों की बात करें तो सबसे ज्यादा किशनगंज विधानसभा क्षेत्र में 49,340 मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट लिस्ट से कटे हैं। जबकि, सबसे कम ठाकुरगंज विधानसभा में 29,277 मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं।

जहां महागठबंधन मजबूत, वहां साढ़े 16 लाख वोटरों के नाम कटे

महागठबंधन के मजबूत इलाकों की बात करें तो इसमें पटना कमिश्नरी सबसे ऊपर है। यहां के 6 जिलों में विधानसभा की 43 सीटें आती हैं। 2020 विधानसभा चुनाव के आंकड़ों के मुताबिक, 27 सीटों पर महागठबंधन का कब्जा है। जबकि 16 सीटों पर NDA की जीत हुई थी।

चुनाव आयोग के मुताबिक, पटना कमिश्नरी में 10 लाख 42 हजार 570 वोटरों के नाम ड्रॉफ्ट लिस्ट में नहीं है।

वहीं, महागठबंधन के दूसरे मजबूत गढ़ मगध प्रमंडल के 5 जिलों में 6 लाख 15 हजार 362 वोटरों के नाम कटे हैं। मगध में विधानसभा की 26 सीटें आती हैं। 2020 के विधानसभा चुनाव में 19 सीटों पर महागठबंधन जीता था। 7 सीटों पर NDA की जीत हुई थी।

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