अमेरिका ने युद्ध खत्म करने को लेकर जो MoU साइन किया है, उसके छठ पॉइंट में साफ-साफ लिखा है कि रिकंस्ट्रक्शन प्लान के तहत ईरान में ‘300 अरब डॉलर’ की राशि का निवेश किया जाएगा. लेकिन इस पॉइंट को लेकर अब ‘कन्फ्यूजन’ इस बात पर बढ़ता जा रहा है कि ईरान को पैसे आखिर देगा कौन? अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के दावों ने इस कन्फ्यूजन को और बढ़ा दिया है.
ट्रंप और वेंस ने गुरुवार को इस बात का भरोसा दिलाने की पूरी-पूरी कोशिश की कि इस प्लान के तहत अमेरिकी टैक्सपेयर्स के पैसे का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा. लेकिन विपक्षी डेमोक्रेट्स और कुछ रिपब्लिकन्स ने भी फंड के मुद्दे को उठाया है.
बुधवार को जिस MoU पर ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने साइन किए हैं, उसमें कहा गया है कि ‘अमेरिका, रीजन पार्टनर्स के साथ मिलकर ईरान के रिकंस्ट्रक्शन और आर्थिक विकास के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर की एक पक्की और आपसी सहमति वाली योजना तैयार करने का काम करेगा.’ अब ये लागू कैसे होगा? इस पर 60 दिनों की बातचीत के दौरान फैसला लिया जाएगा.
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ट्रंप और वेंस के दावे
300 अरब डॉलर को लेकर अमेरिकी सियासत में जो मुद्दा उठ रहा है, उसे लेकर ट्रंप ने एक बार फिर ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में दावा किया कि इस प्लान के लिए अमेरिका की तरफ से कोई सीधा फंड नहीं दिया जाएगा. ट्रंप ने लिखा कि अमेरिका की तरफ से ईरान को 300 अरब डॉलर का कोई पेमेंट नहीं किया जा रहा है. यह फेक न्यूज है. अमेरिका के लिए तो बस कामयाबी, तेल की कम कीमतें और जीत ही है. स्टॉक मार्केट देखिए. यह डेमोक्रेट्स का प्रोपेगैंडा है.’
ट्रंप की इस पोस्ट से पहले जेडी वेंस ने भी न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि इस प्लान का खर्च ‘अमेरिकी टैक्सपेयर्स’ नहीं उठाएंगे. उन्होंने दावा करते हुए कहा, ‘अमेरिका का एक पैसा भी ईरान को नहीं जाएगा.’
Reporter: Who is funding that $300 billion fund for Iran?
JD Vance: There is a great desire from the Arab world, and from outside the Arab world, to actually get involved in Iran if they behave properly. pic.twitter.com/iPSGOFV4sK
— Clash Report (@clashreport) June 18, 2026
बाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में वेंस ने संकेत दिया कि इस फंड के लिए क्षेत्रीय अरब देशों और ईरान में निवेश करने की चाहत रखने वाले बाहरी देशों से पैसे जुटाए जा सकते हैं. हालांकि, वेंस ने यह भी कहा कि ईरान को यह पैसा तब मिलेगा, जब वह पूरी तरह से डील की शर्तों को मानेगा और अपना बर्ताव बदलेगा. हालांकि, अभी तक किसी भी देश ने अमेरिका के प्लान के लिए वित्तीय मदद देने की पुष्टि नहीं की है.
अपने घर में घिरे ट्रंप
इस फंड को लेकर ट्रंप अब अमेरिका में बुरी तरह घिरते जा रहे हैं. विपक्षी डेमोक्रेट्स नवंबर में होने वाले मिड-टर्म इलेक्शन से पहले इस मुद्दे को भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे.
सीनेटर एमी क्लोबुचर ने कहा था, ‘300 अरब डॉलर से हम बेघरों की समस्या को खत्म कर सकते हैं, 40 साल तक कैंसर पर रिसर्च के लिए फंड दे सकते हैं और हर बच्चे को 7 साल तक मुफ्त शिक्षा दे सकते हैं. इसके बजाय ट्रंप इसे ईरान भेज रहे हैं.’
With $300 billion, we could end homelessness, fund cancer research for 40 years, and give every child free pre-K for over 7 years. Instead, Trump is sending it to Iran. This is not America First. Not even close.
— Amy Klobuchar (@amyklobuchar) June 16, 2026
सीनेट में डेमोक्रेट्स के नेता चक शूमर ने कहा, ‘डेमोक्रेट्स ईरान को 300 अरब डॉलर भेजने में ट्रंप की मदद नहीं करेंगे.’ उन्होंने एक और पोस्ट में लिखा, ‘ट्रंप दावा कर रहे हैं कि अमेरिका ईरान को 300 अरब डॉलर नहीं देगा. ये उनके खुद के साइन हैं. उन्हें अपना MoU पढ़ना चाहिए.’
Trump is claiming there is no $300 Billion Dollar payment to Iran by the U.S…
These are his handwritten initials. He should read his own memo of understanding. pic.twitter.com/RhiWXBBmEL
— Chuck Schumer (@SenSchumer) June 18, 2026
एक और सांसद जेसन क्रो ने X पर लिखा कि ‘रिपब्लिकन्स के पास अमेरिकियों की हेल्थकेयर को बेहतर बनाने के लिए पैसे नहीं मिलेंगे, लेकिन ईरान को 300 अरब डॉलर देने के लिए उनके पास पैसे हैं.’
Republicans won’t find the money to help Americans keep their healthcare.
But they will find the money to get Iran $300 billion. https://t.co/zUvCRVdpkb
— Rep. Jason Crow (@RepJasonCrow) June 18, 2026
डेमोक्रेट्स के अलावा ट्रंप की ही रिपब्लिकन पार्टी के कुछ नेता भी इससे नाराज हैं. इनमें ट्रंप के सहयोगी सीनेटर रोजर विकर भी शामिल हैं. उन्होंने कहा कि ‘300 अरब डॉलर की इस रकम के लिए भले ही अमेरिकी टैक्सपेयर्स का पैसा इस्तेमाल न हो, लेकिन ये 2015 में राष्ट्रपति ओबामा की डील के तहत ईरान को दी गई रकम को बहुत मामूली बना देगी.’
Senate Armed Services Chair Wicker tears into Iran deal after no commenting all week, says he’s “concerned” that it’s “out of step with the president’s goals”
“the $300 billion fund for the reconstruction and economic development of Iran – though not funded by U.S. taxpayers –… pic.twitter.com/YNQidKRcNm
— Burgess Everett (@burgessev) June 18, 2026
उन्होंने 2015 के ‘जॉइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन’ (JCPOA) का जिक्र किया, जिसके तहत ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने और नियमित निरीक्षण की अनुमति देने के बदले प्रतिबंधों में ढील पाने का समझौता किया था. इसके बदले अमेरिका ने ईरान की लगभग 55 अरब डॉलर की रुकी हुई संपत्ति जारी की थी. यह संपत्ति ज्यादातर विदेशी बैंकों में रखी हुई थी.
ट्रंप 2018 में इस समझौते से एकतरफा तरीके से अलग हो गए थे. उन्होंने बार-बार दावा किया था कि ईरान के साथ भविष्य में जो भी समझौता होगा, वह JCPOA से कहीं ज्यादा बेहतर होगा.
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