16.7 C
London
Monday, August 3, 2026
Home Business Sawan Somwar 2026 Live: सावन का पहला सोमवार आज, जानें पूजा मुहूर्त...

Sawan Somwar 2026 Live: सावन का पहला सोमवार आज, जानें पूजा मुहूर्त और शिवलिंग पर क्या चढ़ाना होगा शुभ

0
76

Mon, 03 Aug 2026 10:51 AM IST

धर्म डेस्क, अमर उजाला

Published by: मेघा कुमारी

Updated Mon, 03 Aug 2026 10:51 AM IST

Sawan Somwar 2026 Live: सावन का पहला सोमवार आज, 3 अगस्त 2026 को है। यह दिन भगवान शिव की पूजा-अर्चना के लिए बेहद शुभ और पवित्र माना जाता है। इस दिन शिवलिंग पर भांग, बेलपत्र, चंदन और पंचामृत अर्पित करने से सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और मनचाहा जीवनसाथी प्राप्त होने का आशीर्वाद मिलता है। आइए सावन के पहले सोमवार का महत्व, व्रत, पूजा विधि और इससे जुड़े जरूरी नियमों को जानते हैं..

Sawan Somwar 2026 Live Shubh Muhurat Puja Vidhi and Vrat Niyam in Hindi

Sawan First Somwar 2026
– फोटो : AI

लाइव अपडेट

10:51 AM, 03-Aug-2026

तीन बार पूजा के प्रसाद को बांटे


shiv ji
– फोटो : freepik

तीन बार पूजा के प्रसाद को बांटे

पूजा के बाद प्रसाद को तीन बराबर भागों में बांटने की परंपरा है। पहला भाग गाय को खिलाएं, दूसरा परिवार के सदस्यों में वितरित करें और तीसरा भाग स्वयं ग्रहण करें। धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से व्रत का पुण्य बढ़ता है और भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। व्रत के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करना, प्रत्येक सोमवार एक ही समय पर पूजा करना और फलाहार या सात्विक भोजन ग्रहण करना शुभ माना गया है। कई श्रद्धालु इस दिन नमक का भी त्याग करते हैं।

 

10:04 AM, 03-Aug-2026

शिव जी की आरती 


शिव जी की आरती 
– फोटो : Instagram

शिव जी की आरती 

ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।

ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव अर्द्धांगी धारा।।

ओम जय शिव ओंकारा।।

एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे। हंसानन गरूड़ासन

वृषवाहन साजे।।

ओम जय शिव ओंकारा।।

दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।

त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे।।

ओम जय शिव ओंकारा।।

अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।

त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी।।

ओम जय शिव ओंकारा।।

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।

सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे।।

ओम जय शिव ओंकारा।।

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।

मधु कैटव दोउ मारे, सुर भयहीन करे।।

ओम जय शिव ओंकारा।।

लक्ष्मी, सावित्री पार्वती संगा।

पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा।।

ओम जय शिव ओंकारा।।

पर्वत सोहें पार्वतू, शंकर कैलासा।

भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा।।

ओम जय शिव ओंकारा।।

जया में गंग बहत है, गल मुण्ड माला।

शेषनाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला।।

ओम जय शिव ओंकारा।।

काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।

नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी।।

ओम जय शिव ओंकारा।।

त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोई नर गावे।

कहत शिवानन्द स्वामी मनवान्छित फल पावे।।

ओम जय शिव ओंकारा।। ओम जय शिव ओंकारा।।

09:31 AM, 03-Aug-2026

कैसे शुरू करें व्रत?


Sawan
– फोटो : Adobe stock

कैसे शुरू करें व्रत?

धार्मिक मान्यताओं की मानें तो सोलह सोमवार व्रत शुरू करने से पहले विधिवत संकल्प लेना चाहिए। इसके लिए ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और भगवान शिव के समक्ष बैठकर हाथ में जल, अक्षत और बेलपत्र लेकर संकल्प लें कि आप श्रद्धा और भक्ति के साथ लगातार सोलह सोमवार तक व्रत और पूजा करेंगे। शास्त्रों में संकल्प और नियमितता को व्रत की सफलता का आधार माना गया है।

हर सोमवार भगवान शिव की विधिपूर्वक पूजा करें। शिव परिवार के समक्ष घी के पांच दीपक जलाएं और ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जप करें। भगवान शिव को बेलपत्र, भांग, धतूरा, पुष्प, जल, पंचामृत, रोली और अक्षत अर्पित करें। पूजा में बिल्व पत्र का विशेष महत्व बताया गया है। वहीं, मौसमी फलों के साथ घेवर का भोग भी लगाया जा सकता है।

09:13 AM, 03-Aug-2026

Sawan First Somwar 2026: शिवलिंग पर क्यों चढ़ाया जाता बेलपत्र ? 

भगवान शिव की पूजा बिना जलाभिषेक और बेलपत्र अर्पित किए पूरी नहीं मानी जाती है। भगवान शिव को बेलपत्र बहुत ही प्रिय होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बेलपत्र की तीन पत्तियां भगवान शिव के तीन नेत्र हैं। इसके अलावा बेलपत्र की तीन जुड़ी पत्तियां त्रिदेव ब्रह्राा, विष्णु और महेश का प्रतीक मानी जाती है। वहीं इसके अलावा बेल पत्र की तीन पत्तियां सत, रज और तमोगुण का प्रतीक है। वहीं बेल पत्र की तासीर ठंडी होती है और इसे शिवलिंग पर चढ़ाने से शिवजी को शीतलता प्राप्ति होती है। वहीं स्कंद पुराण के अनुसार बेल के पेड़ में माता पार्वती का वास भी भी माना जाता है। इसलिए भगवान को शिव बेलपत्र अत्याधिक प्रिय होता है। 

09:03 AM, 03-Aug-2026

सावन में इन चीजों को करने से करें परहेज

– सावन के पवित्र महीने में मांस, मदिरा, प्याज, लहसुन और तले-भुनी चीजों से परहेज करें।

– सावन महीने के दौरान बाल, नाखून और दाढ़ी काटने से परहेज करें।

– सावन में दूध पीने से बचें बल्कि कच्चे दूध से जलाभिषेक करें। 

– सावन में वाद-विवाद से बचें और किसी से कड़वी बातें न बोलें।

08:48 AM, 03-Aug-2026

Sawan Somwar 2026: सावन में रुद्राभिषेक का महत्व और लाभ

गाय का दूध- भगवान भोलेनाथ का गाय के दूध से रुदाभिषेक करने से आरोग्य लाभ, अच्छी सेहत और दीर्घायु की प्राति होती है। 

दही- सावन में दही से रुद्राभिषेक करने से गृह क्लेश दूर होता है। इसके अलावा वाहन और संपत्ति सुख की प्राप्ति होती है। 

पंचामृत- सावन में पंचामृत से रुद्राभिषेक करने से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति और आर्थिक सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। 

गन्ने का रस- सावन में दरिद्रता का नाश और अटके हुए धन की प्राप्ति के लिए सावन में गन्ने के रस से रुद्राभिषेक करना चाहिए।

08:30 AM, 03-Aug-2026

Sawan First Somwar 2026: सावन सोमवार व्रत के नियम

  • सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनकर भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा और अभिषेक करें।
  • व्रत के दौरान सात्विक भोजन का ही सेवन करें।
  • व्रत के दौरान क्रोध और नकारात्मक विचारों से दूर रहें।
  • पूजा के बाद जरूरतमंद लोगों को दान करना शुभ माना जाता है।
  • शिव पूजन में बेलपत्र अवश्य अर्पित करें, क्योंकि यह भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है।
  • पूरे दिन संयम और ब्रह्मचर्य का पालन करें।
  • व्रत के दिन अधिक समय तक सोने या दिन में शयन करने से बचें।

08:10 AM, 03-Aug-2026

Sawan Somwar 2026: शिवलिंग पर क्या चढ़ाएं?

  • शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करें। इसे भगवान शिव का सबसे प्रिय पत्र माना जाता है।
  • शमी के फूल या शमी के पत्ते चढ़ाना शुभ माना जाता है।
  • दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक करें। इससे भगवान शिव प्रसन्न होते हैं।
  • साबुत चावल अर्पित करें। इससे मनोकामनाएं पूरी होने की मान्यता है।
  • केसर चढ़ाना भी शुभ माना जाता है। इससे सुख-समृद्धि और शुभ फल की प्राप्ति होती है।
  • भांग और धतूरा भगवान शिव को अर्पित किए जा सकते हैं, क्योंकि इन्हें शिव का प्रिय माना गया है।
  • मौसमी फल, अनाज अर्पित कर सकते हैं।

07:53 AM, 03-Aug-2026

शिवलिंग पर क्या अर्पित न करें? 

शिवलिंग पर अर्पित की जाने वाली वस्तुओं को लेकर भी कुछ नियम बताए गए हैं। हल्दी और कुमकुम को शिव पूजा में नहीं चढ़ाया जाता, क्योंकि इन्हें स्त्री-श्रृंगार से जुड़ा माना जाता है। तुलसी के पत्ते भी शिवलिंग पर अर्पित नहीं किए जाते, जबकि केतकी का फूल भगवान शिव को प्रिय नहीं माना गया है। इसके अलावा, बेलपत्र अर्पित करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि वह साबुत और साफ हो, कटे-फटे पत्ते चढ़ाना उचित नहीं है।

07:35 AM, 03-Aug-2026

Sawan First Somwar 2026: सावन सोमवार और कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व

सनातन धर्म में सावन के महीने का विशेष महत्व होता है। यह महीना भगवान शिव का सबसे प्रिय महीना माना जाता है और इसमें शिवजी की जो भी उपासना करता है उसकी हर एक मनोकामना जल्द से जल्द पूरी होती है। सावन महीने में आने वाले हर सोमवार और कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व होता है। सावन सोमवार पर शिवभक्ति शिवलिंग पर जलाभिषेक और पूजा अर्चना करते हैं। इस दिन कुंवारी कन्याएं मनचाहा वर की प्राप्ति के लिए व्रत रखती हैं। इसके कांवड यात्रा में पवित्र नदियों से जल लाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। धार्मिक मान्यतओं के अनुसार सावन सोमवार का व्रत रखने से विशेष कृपा मिलती है। इस वर्ष सावन महीने में चार सोमवार व्रत पड़ेंगे। 

Get $10 by answering a Simple Survey. Click Here