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कल्याण बनर्जी का अल्टीमेटम

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कोलकाता/नई दिल्ली47 मिनट पहले

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TMC के राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बराइक और कोयल मल्लिक ने गुरुवार को राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। पिछले चार दिन में 13 में से चार राज्यसभा सांसद ममता को छोड़कर जा चुके हैं।

10 जून को सुष्मिता देव ने रिजाइन किया था। 8 जून को सुखेंदु शेखर ने राज्यसभा सदस्यता और पार्टी छोड़ी थी। इससे पहले TMC की बागी सांसद काकोली घोष ने दावा किया था कि 20 लोकसभा सांसद अलग गुट बना चुके हैं। वहीं, 80 में से 58 TMC विधायक अलग गुट बना चुके हैं।

इस बीच, ममता बनर्जी के सबसे करीबी सांसद कल्याण बनर्जी की भी नाराजगी सामने आई। कल्याण की नाराजगी की वजह TMC का फर्जी साइन केस है।

उन्होंने कहा कि ममता दीदी को तय करना होगा कि वे मेरे साथ हैं या अभिषेक बनर्जी के साथ। अभिषेक को सीनियर नेताओं का सम्मान करना नहीं आता। वे बहुत अहंकारी हैं। इसी वजह से पार्टी बर्बाद हुई है। उन्होंने कहा,

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अगर ममता दीदी को अभिषेक पर ही निर्भर रहना है, तो उनके साथ रहें और मुझे छोड़ दे। अगर उनसे अलग रास्ता चुनती हैं, तो मैं ममता दीदी के साथ हूं।

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उन्होंने बताया कि मुझे आधी रात को बताया गया कि केस से जुड़े वकील बदल दिए गए हैं। इनमें मैं भी था। यह अपमानजनक है।

प्रकाश चिक बड़ाईक ने राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन को इस्तीफा सौंपा।

प्रकाश चिक बड़ाईक ने राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन को इस्तीफा सौंपा।

इस्तीफे के बाद प्रकाश चिक बोले- मैं बूढ़ा नहीं हुआ, आगे समय बताएगा

इस्तीफे के बाद मीडिया से बात करते हुए प्रकाश चिक ने कहा- पश्चिम बंगाल में लोगों का फैसला भाजपा के पक्ष में था। पार्टी ने वहां सरकार बनाई। मेरे अपने चुनाव क्षेत्र में हम एक भी सीट नहीं जीत पाए। उत्तर बंगाल में भी नतीजे अच्छे नहीं रहे।

इस जनादेश को देखते हुए मुझे लगा कि अब मेरे पद पर बने रहना ठीक नहीं है। इसलिए, मैंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। आगे इंतजार कीजिए, समय के साथ सब सामने आएगा। मैं अभी बूढ़ा नहीं हूं। भविष्य में मैं क्या करूंगा, यह समय ही तय करेगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोयल मलिक ने राज्यसभा से इस्तीफा ईमेल के जरिए भेजा है। राज्यसभा सचिवालय ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से दिल्ली आकर इस्तीफा सौंपने के लिए कहा है।

2 सांसद शत्रुघ्न सिन्हा और प्रतिमा मंडल ने कहा- हम टीएमसी के साथ

TMC सांसद शत्रुघ्न सिन्हा- ममता बनर्जी एक स्ट्रीट फाइटर हैं। पार्टी में संकट के बावजूद उनके साथ अब भी 41% वोट शेयर है। हालांकि इससे पहले उन्होंने X पर लिखा था कि पीएम मोदी देश और समाज के मार्गदर्शक हैं। मैं आपके लंबे, स्वस्थ और समृद्ध जीवन की कामना करता हूं।

सांसद सौगत रॉय ने कहा- कांग्रेस और टीएमसी का साथ काम करना जरूरी है। इतना मैं कह सकता हूं। विलय होगा या गठबंधन, यह आगे देखा जाएगा।

TMC के बागी नेता रिजु दत्ता- ‘युवराज का अब चक्की पीसने का समय आ गया है। वह ऐसा व्यक्ति है जो काउंसलर बनने के भी लायक नहीं था, लेकिन ममता बनर्जी ने धृतराष्ट्र की तरह आंखें बंद कर उसे राजनीति में स्थापित कर दिया। अभिषेक ने सालों तक पार्टी के सांसदों, विधायकों और नेताओं का अपमान किया। मेरे जैसे प्रवक्ताओं को गुलाम समझा गया। एक अकेले व्यक्ति ने पार्टी को बर्बाद कर दिया।’

कल्याण बनर्जी के बेटे शिरसान्य बंदोपाध्याय- समस्या यह है कि अभिषेक बनर्जी किसी पर भरोसा नहीं कर सकते। वह हम पर भी भरोसा नहीं कर पा रहे हैं। वह एक दूसरी लाइन तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं। हमने हाईकोर्ट, जिला कोर्ट, सब-डिविजनल कोर्ट, जहां भी मुमकिन हो उनकी मदद करने की कोशिश की है।

कांग्रेस ने TMC के साथ विलय की अटकलों को अफवाह बताया

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कांग्रेस और TMC के विलय की खबरों को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह बेबुनियाद अफवाह है।

वेणुगोपाल बोले- ममता और अभिषेक ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी से मुलाकात की थी, लेकिन यह एक सामान्य राजनीतिक मीटिंग थी। TMC INDIA ब्लॉक का हिस्सा है। कांग्रेस और TMC के विलय को लेकर चल रही चर्चाओं में कोई सच्चाई नहीं है।

TMC सांसदों के अलग गुट पर सस्पेंस, अब तक लिस्ट सामने नहीं आई

TMC के बागी 20 सांसदों के नाम अब तक सामने नहीं आए हैं। सांसद और बागी नेता काकोली घोष ने 8 जून को दावा किया था कि 20 सांसदों ने एनडीए को समर्थन देने का फैसला किया है। स्पीकर ओम बिरला को इनके समर्थन की चिट्ठी दे दी गई है।

इसके बाद काकोली ने कुछ बागी सांसदों के साथ केंद्रीय मंत्री और भाजपा के बंगाल प्रभारी भूपेंद्र यादव से मुलाकात और बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी के साथ दिल्ली में बैठक भी की थी।

इसके बाद 10 जून को एक लिस्ट भी सामने आई जिसमें सायोनी घोष, यूसुफ पठान और शत्रुघ्न सिन्हा समेत 19 सांसदों के नाम थे। हालांकि 11 जून को शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा है कि वह ममता और टीएमसी के साथ हैं, क्योंकि उन्होंने मेरे बुरे वक्त में साथ दिया था।

एक दिन पहले सामने आए TMC के 19 बागी लोकसभा सांसदों के नाम…

लोकसभा सीट सांसद लोकसभा सीट सांसद
बारासात काकोली घोष दस्तीदार घाटाल दीपक अधिकारी (देव)
कूचबिहार जगदीश चंद्र बसुनिया झाड़ग्राम कालीपद सोरेन
जांगीपुर खलीलुर रहमान मेदिनीपुर जून मालिया
बहरामपुर यूसुफ पठान बांकुड़ा अरूप चक्रवर्ती
मुर्शिदाबाद अबू ताहेर खान बर्धमान पूर्व डॉ. शर्मिला सरकार
बैरकपुर पार्थ भौमिक आसनसोल शत्रुघ्न सिन्हा
मथुरापुर बापी हलदार बोलपुर असित कुमार माल
जादवपुर सायोनी घोष बीरभूम शताब्दी रॉय
कोलकाता दक्षिण माला रॉय हुगली रचना बनर्जी
आरामबाग मिताली बाग

पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता का विवाद, HC ने सवाल उठाया

कलकत्ता हाईकोर्ट ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता विपक्ष (LoP) के चयन को लेकर विधानसभा स्पीकर के फैसले पर सवाल उठाया। जस्टिस कृष्णा राव ने पूछा कि क्या किसी राजनीतिक दल की मंजूरी के बिना किसी बागी विधायक को नेता विपक्ष के रूप में मान्यता दी जा सकती है।

कोर्ट TMC की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी को नेता विपक्ष के रूप में मान्यता दिए जाने को चुनौती दी गई है। TMC ने स्पीकर के फैसले पर अंतरिम रोक की मांग की। मामले की अगली सुनवाई 16 जून को होगी।

फर्जी सिग्नेचर केस में अभिषेक को गिरफ्तारी से राहत, HC ने 3 हफ्ते की सुरक्षा दी

फर्जी सिग्नेचर केस में कलकत्ता हाईकोर्ट ने गुरुवार को TMC सांसद अभिषेक बनर्जी के खिलाफ तीन हफ्ते तक किसी भी तरह की सख्त कार्रवाई पर रोक लगा दी है। जस्टिस कौशिक चंदा ने अभिषेक को आज शाम 6 बजे तक CID मुख्यालय पहुंचने का आदेश दिया था। अभिषेक शाम करीब 5:50 बजे वहां पहुंचे।

कोर्ट ने कहा कि आगे भी CID जब पूछताछ के लिए बुलाए, तो 24 घंटे पहले नोटिस देना होगा। मामले की अगली सुनवाई दो हफ्ते बाद होगी।

ममता 3 दिन दिल्ली में रहीं, राहुल- सोनिया से मुलाकात की

ममता 3 और अभिषेक 5 दिन दिल्ली में रहे। 10 जून को अभिषेक ने दिल्ली में राहुल गांधी से मुलाकात की थी। वहीं, 9 जून को ममता सोनिया गांधी से मिलीं थीं। इसके अलावा इंडिया ब्लॉक की मीटिंग में भी शामिल हुए।

टीएमसी छोड़ने वाली सुष्मिता देव ने 10 जून को असम सीएम से मुलाकात की। वहीं अभिषेक बनर्जी दिल्ली में राहुल से मिलने पहुंचे।

टीएमसी छोड़ने वाली सुष्मिता देव ने 10 जून को असम सीएम से मुलाकात की। वहीं अभिषेक बनर्जी दिल्ली में राहुल से मिलने पहुंचे।

दिल्ली में सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद ममता कोलकाता लौटीं।

दिल्ली में सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद ममता कोलकाता लौटीं।

TMC सांसदों और विधायकों की ममता से बगावत का घटनाक्रम…

8 जून: ममता बनर्जी के 28 में से 20 लोकसभा सांसद टूटे

8 जून को टीएमसी के लोकसभा के 28 सांसदों में से 20 ने एनडीए सरकार को समर्थन देने का फैसला किया था। सांसद और TMC की पूर्व नेता काकोली घोष दस्तीदार ने कहा था कि सांसदों के साइन वाला पत्र लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को भेज दिया है। इसमें अलग संसदीय ब्लॉक के रूप में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग भी की गई।

3 जून: 28 साल पुरानी TMC में बगावत, 58 विधायक अलग हुए

3 जून को टीएमसी में पहली बार बगावत की खबर सामने आई थी। 58 बागी विधायकों ने पार्टी से निकाले गए विधायक ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुना। विधानसभा स्पीकर रथींद्र बोस को समर्थन पत्र दिया। इसमें मांग की गई कि ऋतब्रत को नेता विपक्ष घोषित किया जाए। स्पीकर ने मंजूरी दे दी।

ममता के पास अब सिर्फ 22 विधायक और 18 सांसद बचे

टीएमसी के पास कुल 28 लोकसभा सांसद थे, जिसमें से 20 अलग हो गए हैं। अब लोकसभा में ममता के पास सिर्फ 8 सांसद बचे हैं। राज्यसभा की बात करें तो 13 में से 3 सांसद इस्तीफा दे चुके हैं यानी सिर्फ 19 राज्यसभा सांसद बचे हैं।

विधानसभा की बात करें तो टीएमसी ने इस बार के चुनाव में 80 सीटें जीती थीं। जिसमें से 58 विधायक अलग गुट बना चुके हैं। ममता के पास सिर्फ 22 विधायक बचे हैं।

TMC बचाने के लिए ममता-अभिषेक की 3 कोशिशें…

  • टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने बुधवार को दिल्ली में राहुल गांधी से मुलाकात की। सूत्रों के मुताबिक, दोनों पार्टियों के बीच मजबूती बनाए रखने पर चर्चा हुई।
  • ममता बनर्जी ने मंगलवार को सोनिया गांधी से मुलाकात की। ममता सोनिया के आवास 10 जनपथ पहुंचीं। दोनों नेताओं की मुलाकात करीब एक घंटे तक चली।
  • 8 जून को करीब दो साल बाद हुई INDIA की बैठक में ममता और अभिषेक भी शामिल हुए थे। इस बैठक में 25 विपक्षी दल शामिल हुए थे।

TMC में फूट के बाद आगे क्या हो सकता है…9 संभावनाएं

कानूनी लड़ाई तेज होगी: ममता गुट और बागी गुट विधानसभा, चुनाव आयोग और अदालतों में अपनी-अपनी वैधता साबित करने की कोशिश करेंगे।

दल-बदल कानून की परीक्षा: बागी विधायकों के पास दो-तिहाई संख्या होने का दावा है, इसलिए उनकी मान्यता पर बड़ा कानूनी विवाद हो सकता है।

संगठन में और टूट-फूट संभव: कुछ विधायक, सांसद और जिला स्तर के नेता भी पक्ष चुन सकते हैं, जिससे दोनों गुटों की ताकत बदल सकती है।

ममता बनर्जी डैमेज कंट्रोल करेंगी: असंतुष्ट नेताओं को मनाने, संगठन में बदलाव और नए चेहरों को आगे लाने की कोशिश हो सकती है।

भाजपा और कांग्रेस नजर बनाए रखेंगी: विपक्षी दल TMC के संकट का राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कर सकते हैं।

स्थानीय निकाय और उपचुनावों पर असर: अगर फूट गहरी हुई तो आने वाले चुनावों में TMC के वोट बैंक और संगठन पर असर पड़ सकता है।

नई पार्टी या अलग गुट बन सकता है: यदि समझौता नहीं हुआ तो बागी खेमे के अलग राजनीतिक दल या स्थायी गुट के रूप में उभरने की संभावना है।

INDIA गठबंधन की राजनीति प्रभावित होगी: ममता बनर्जी की राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका और INDIA ब्लॉक के भीतर उनकी ताकत पर असर पड़ सकता है।

सबसे बड़ा सवाल- TMC किसकी? आने वाले दिनों में असली लड़ाई सिर्फ विधायकों की संख्या की नहीं, बल्कि पार्टी के नाम, संगठन और राजनीतिक विरासत की होगी।

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