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ज्यादा खून ले सकता है जान: ब्लड की कमी ही नहीं, इसका अधिक होना भी जानलेवा; आपको तो नहीं होती ये परेशानी

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ज्यादा खून ले सकता है जान: ब्लड की कमी ही नहीं, इसका अधिक होना भी जानलेवा; आपको तो नहीं होती ये परेशानी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

Published by: विकास कुमार

Updated Thu, 11 Jun 2026 06:33 PM IST

विशेषज्ञों के अनुसार कई मामलों में यह समस्या शुरुआती चरण में बिना किसी स्पष्ट लक्षण के भी मौजूद रहती है। इसलिए नियमित स्वास्थ्य जांच और रक्त परीक्षण के जरिए इसकी समय पर पहचान जरूरी है। समय रहते इलाज न मिलने पर यह स्थिति गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकती है।

not just lack of blood excess of it can also be fatal

खून की कमी ही नहीं, खून का अधिक होना भी जानलेवा
– फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अक्सर लोगों का ध्यान एनीमिया यानी खून की कमी पर जाता है, लेकिन शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं (आरबीसी) की संख्या सामान्य से अधिक होना भी स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। इस स्थिति में खून गाढ़ा हो जाता है, जिससे शरीर में रक्त प्रवाह प्रभावित होने लगता है और हार्ट अटैक, स्ट्रोक व रक्त के थक्के बनने का खतरा बढ़ सकता है।

इसे कहा जाता है पॉलीसाइथीमिया

चिकित्सकों का कहना है कि लाल रक्त कोशिकाओं की अधिकता को पॉलीसाइथीमिया कहा जाता है। यह समस्या धूम्रपान, फेफड़ों की बीमारियों, शरीर में लंबे समय तक ऑक्सीजन की कमी, डिहाइड्रेशन या बोन मैरो से जुड़ी कुछ बीमारियों के कारण होती है। मरीजों में सिरदर्द, चक्कर आना, धुंधला दिखना, थकान और त्वचा में खुजली जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

 

शुरुआत में बिना लक्षण के रहते है मौजूद

विशेषज्ञों के अनुसार कई मामलों में यह समस्या शुरुआती चरण में बिना किसी स्पष्ट लक्षण के भी मौजूद रहती है। इसलिए नियमित स्वास्थ्य जांच और रक्त परीक्षण के जरिए इसकी समय पर पहचान जरूरी है। समय रहते इलाज न मिलने पर यह स्थिति गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकती है।

केस स्टडी

दिल्ली का रहने वाला एक 35 वर्षीय युवक इस समस्या के साथ गुरु तेग बहादुर अस्पताल पहुंचा। जांच के दौरान सामने आया कि खून की अधिकता के कारण युवक को सांस लेने में दिक्कत, धुंधला दिखाई देना जैसी परेशानी हो रही थी। डॉक्टर ने सलाह दी कि वह अपनी दिनचर्या में कम से कम आधे घंटे व्यायाम करे। उपचार के बाद युवक की स्थिति में सुधार है।

हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है

डॉ. संदीप ने बताया कि खून का अधिक होना भी उतना ही गंभीर विषय है जितना खून की कमी होना। जब शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या जरूरत से ज्यादा बढ़ जाती है तो खून गाढ़ा होने लगता है, जिससे नसों में रक्त प्रवाह धीमा पड़ सकता है। इसके कारण रक्त के थक्के बनने, हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए।

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

-बार-बार सिरदर्द या चक्कर आना।

-धुंधला दिखाई देना।

-त्वचा में खुजली या लालिमा।

-अत्यधिक थकान महसूस होना।

-सांस फूलना।

-हाथ-पैरों में झुनझुनी या सुन्नपन महसूस होना।

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