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पहलगाम हमले की जांच में पाकिस्तानी कनेक्शन मिला:NIA बोली

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नई दिल्ली9 मिनट पहलेलेखक: रऊफ डार

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पहलगाम के बैसरन में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले में 26 पर्यटकों की मौत हुई थी। - Dainik Bhaskar

पहलगाम के बैसरन में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले में 26 पर्यटकों की मौत हुई थी।

पहलगाम आतंकी हमले की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने नया खुलासा किया है। NIA के मुताबिक हमले में शामिल आतंकियों का 28 जुलाई को एनकाउंटर हुआ था। इनके पास से ऑरेंज कलर का RedMi 9T और एक ब्लैक कलर का RedMi Note 12 बरामद हुआ था।

NIA के मुताबिक दोनों फोन की जानकारी निकाली गई। इसमें सामने आया कि मोबाइल 2021 और 2023 में चीन की कंपनी Xiaomi की सप्लाई चेन के जरिए पाकिस्तान पहुंचाए गए थे। RedMi 9T कराची की कंपनी टेक सिराट प्राइवेट लिमिटेड ने इम्पोर्ट कराकर कराची डिलीवर कराया था।

NIA ने बताया कि आतंकियों ने पहलगाम की बैसरन घाटी में हमले की प्लानिंग पहले से कर रखी थी। फोरेंसिक जांच के दौरान मोबाइल के नेविगेशन एप AlpineQuest में बैसरन की लोकेशन सेव मिली। साथ ही बैसरन घाटी के कई स्क्रीनशॉट भी मिले जो 15-16 अप्रैल को लिए गए थे। 22 अप्रैल को अटैक हुआ था।

पिछले साल 22 अप्रैल को कश्मीर की बैसरन घाटी में आतंकी हमला हुआ था। आतंकियों ने लोगों को धर्म पूछकर गोली मारी।

पिछले साल 22 अप्रैल को कश्मीर की बैसरन घाटी में आतंकी हमला हुआ था। आतंकियों ने लोगों को धर्म पूछकर गोली मारी।

Redmi 9T मोबाइल की जनवरी 2021 में पाकिस्तान में डिलीवरी हुई

NIA ने Redmi 9T मोबाइल के IMEI नंबर के आधार पर Xiaomi Global से संपर्क किया। मोबाइल की सप्लाई हिस्ट्री मांगी। कंपनी के रिकॉर्ड के मोबाइल 1 जनवरी 2021 को पाकिस्तान पहुंचे बड़े कंसाइनमेंट में शामिल था। कराची की कंपनी Tech Sirat Pvt Ltd ने इसे इम्पोर्ट कराया था।

रिकॉर्ड के मुताबिक कंसाइनमेंट की फंडिंग और लॉजिस्टिक व्यवस्था कराची की ही Faysal Bank ने की थी। डिलीवरी का पता भी बैंक के हेड ऑफिस St/02, Faysal House, Main Branch, Shahrah-e-Faisal, Karachi, Pakistan लिखा था। इस बैंक का नाम पहले भी आतंकवाद से जुड़े मामलों में सामने आ चुका है।

कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि प्रतिबंधित आतंकी और अन्य संगठनों के अकाउंट इस बैंक में थे। हालांकि बैंक ने हमेशा इन आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि प्रतिबंध लगते ही संबंधित खातों पर एक्शन लिया गया है।

NIA के मुताबिक डिलीवरी के 4 साल बाद यानी साल 2025 में मोबाइल एक्टिव हुआ। बाद में पहलगाम हमले में शामिल आतंकियों के पास मिला। अधिकारियों का मानना है कि यह महज संयोग नहीं है। इस फोन को शुरू से ही किसी खास मकसद के लिए अलग रखकर सुरक्षित रखा गया था और जरूरत पड़ने पर आतंकियों को सौंपा गया।

Redmi Note 12 साल 2023 में लाहौर मंगाया गया

NIA ने बताया कि दूसरे फोन Redmi Note 12 साथ भी यही पैटर्न सामने आया है। इसे 2023 में पाकिस्तान की Air Link Communications Limited ने इम्पोर्ट किया था। यह कंपनी लाहौर में है। पाकिस्तान में मोबाइल डिस्ट्रीब्यूटर के क्षेत्र की बड़ी कंपनी है।

यह फोन भी इम्पोर्ट के बाद लंबे समय तक इस्तेमाल नहीं किया गया। इसे भी पहलगाम हमले से ठीक पहले एक्टिव किया गया था। दोनों ही फोन से कोई कॉल रिकॉर्ड, मैसेज, सोशल मीडिया चैट और इंटरनेट कम्युनिकेशन डेटा नहीं मिला।

जांच के मुताबिक आतंकी मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट की बजाय लंबी दूरी की रेडियो कम्यूनिकेशन टेक्निक का इस्तेमाल कर रहे थे। यह टेक्निक मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट से अलग होती है। कई किलोमीटर दूर तक सेफ कम्यूनिकेशन की सुविधा देती है। इसी कारण मोबाइलों से कोई डेटा नहीं मिला।

24 मई: NIA ने बताया- चीन के रास्ते आतंकियों तक पहुंचा GoPro

NIA ने बताया था कि पहलगाम आतंकी हमले के आरोपी आतंकियों के पास से अमेरिकी कंपनी GoPro का कैमरा बरामद हुआ था, जो चीन के रास्ते लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के आतंकियों तक पहुंचा था।

जांच एजेंसी का मानना है कि इस कैमरे का रास्ता समझने से उन नेटवर्कों का खुलासा हो सकता है, जो जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकी संगठनों तक फंड, उपकरण और दूसरे संसाधन पहुंचाते हैं।

यह हाई-टेक कैमरा पिछले साल जुलाई में पहलगाम हमले के बाद दाचीगाम के जंगलों में हुई मुठभेड़ में मारे गए आतंकियों से बरामद हुआ था।

आतंकियों में बॉडी कैमरे का इस्तेमाल बढ़ रहा

NIA अधिकारियों के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में आतंकी संगठन हमलों की रिकॉर्डिंग और बाद में प्रचार के लिए बॉडी कैमरा और एक्शन कैमरा जैसे उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं।

आतंकियों के पास कैमरा कैसे पहुंचा, इसके लिए NIA ने अमेरिकी कंपनी GoPro Inc. से संपर्क किया। कंपनी ने बताया कि यह कैमरा चीन में हमारे ऑथराइज्ड डिस्ट्रीब्यूटर को भेजा गया था।

अब जांच की जा रही है कि चीन से यह कैमरा आतंकियों तक कैसे पहुंचा। अधिकारी गुप्त खरीद नेटवर्क, बिचौलियों और इसमें शामिल लोकल सपोर्ट की जांच कर रहे हैं।

‘पहलगाम हमले में पाकिस्तान का हाथ था’

NIA ने 15 दिसंबर 2025 को पहलगाम अटैक केस में चार्जशीट दाखिल की थी। इसके डिटेल हाल ही में सामने आई। इसमें खुलासा हुआ है कि कश्मीर के पहलगाम में पिछले साल 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले में पाकिस्तान का हाथ था।

हमले का मास्टरमाइंड लश्कर-ए-तैयबा आतंकी सैफुल्लाह उर्फ सैफुल्लाह साजिद जट्‌ट उर्फ लंगड़ा है। जो पाकिस्तान के लाहौर में कसूर में रहता है। साजिद जट्ट ही आतंकियों का मेन हैंडलर था।

हमले के दौरान उसने तीनों आतंकियों से लगातार संपर्क बनाए रखा। वह उन्हें रियल टाइम डायरेक्शन दे रहा था। उसने ही हमले वाली जगह बैसरन वैली की लोकेशन भेजी थी।हमले के दौरान भी वह लगातार आतंकियों से बात कर रहा था।

गिरफ्तार किए गए टूरिस्ट गाइड परवेज और बशीर।

गिरफ्तार किए गए टूरिस्ट गाइड परवेज और बशीर।

टूरिस्ट गाइड ने आतंकियों को देखा था, बता देते तो हमला नहीं होता

  • NIA चार्जशीट के मुताबिक टूरिस्ट गाइड परवेज अहमद जोठार और बशीर अहमद जोठार वक्त रहते जानकारी देते तो हमले को टाला जा सकता था। दोनों गाइड ने आतंकियों को बैसरन में देखा था, लेकिन सुरक्षा एजें​सियों को नहीं बताया। दोनों गाइड्स गिरफ्तार हो चुके हैं।
  • हमले से एक दिन पहले तीनों आतंकियों ने गाइड परवेज की झोपड़ी में खुदा के नाम पर मदद मांग कर खाना खाया। जाते वक्त रोटी-सब्जी भी साथ ले गए थे। तीनों आतंकियों ने फायरिंग से पहले बैसरन घाटी में एक पेड़ के नीचे खाना खाया। वारदात के बाद तीनों ने धार्मिक नारे लगाते हुए हर्ष फायरिंग भी की थी।
  • चार्जशीट के मुताबिक यह हमला धर्म के आधार पर टारगेटेड मर्डर का है, जिसमें 25 टूरिस्ट और एक लोकल की मौत हुई। 28 जुलाई को ऑपरेशन महादेव में मारे गए तीन पाकिस्तानी आतंकियों को भी आरोपी बनाया है।

जेड मोड़ टनल पर हमले में भी शामिल

साजिद, 2005 में वह बॉर्डर क्रॉस करके दक्षिण कश्मीर के कुलगाम में घुसा था। पैर में गोली लगने के कारण साजिद नकली पैर लगाता है। इसलिए उसे लंगड़ा कहा जाता है। उस पर भर्ती, फंडिंग, घुसपैठ और आतंकियों को लॉजिस्टिक सपोर्ट देने के आरोप हैं।

2019 में साजिद जट्ट लंगड़ा ने ही लश्कर के प्रॉक्सी द रजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) को खड़ा किया था। उसे जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों का हैंडलर और ऑपरेशनल कमांडर माना जाता है।

NIA ने उसे कई हमलों की साजिश से जोड़ा है, जिनमें पहलगाम हमला, डांगरी हमला, पुंछ एयरफोर्स काफिले पर हमला और रियासी बस हमला शामिल हैं।

आतंकी लंगड़ा और उसके तीनों गुर्गे 20 अक्टूबर 2024 को श्रीनगर की जेड मोड़ टनल फायरिंग में भी शामिल थे। इसमें 7 लोगों की मौत हो गई थी।

तब सुरक्षा बलों ने एक आतंकी जुनैद को मार गिराया था। उसके पास से बरामद ग्रो प्रो कैमरा और एम4 कार्बाइन तीनों आतंकियों के समान ही थे। दोनों वारदातों का टेरर मॉड्यूल एक ही था।

28 जुलाई: पहलगाम हमले के 3 गुनहगार ढेर

NIA के मुताबिक पहलगाम आतंकी हमले में शामिल पाक आतंकी फैसल जट्‌ट उर्फ सुलेमान, हबीब ताहिर उर्फ जिब्रान भाई और हमजा अफगानी को सुरक्षा बलों ने 28 जुलाई, 2025 को ढेर कर दिया था। भारत के टॉप वांटेड में शामिल आतंकी लंगड़ा पर 10 लाख का इनाम है।

पहलगाम हमले का बदला भारत का ऑपरेशन सिंदूर

भारत ने पहलगाम हमले का बदला लेते हुए 6 मई की रात 1:05 बजे पाकिस्तान और PoK में एयर स्ट्राइक की। इसे ऑपरेशन सिंदूर नाम दिया गया। भारत ने 24 मिसाइलें दागीं थीं।

इसमें 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिसमें 100 से ज्यादा आतंकी मारे गए। हमले में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद चीफ मौलाना मसूद अजहर की फैमिली के 10 सदस्य और 4 सहयोगी मारे गए थे।

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