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कुकिंग के लिए पाइपलाइन से हमारे किचन के बर्नर तक पहुंचने वाली गैस को पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) कहा जाता है। पीएनजी इकोफ्रेंडली ईंधन है। इसका रसोईघर में प्रयोग करना काफी सुविधाजनक, स्थिर और सुरक्षित है। चूंकि इसे पाइपलाइन से किचन में सप्लाई किया जाता हैइसलिए इसमें सिलिंडर की बुकिंग, उसे लाने और अतिरिक्त सिलिंडर को रखने का झमेला मोल नहीं लेना पड़ता। पीएनजी के इस्तेमाल से आपको कम वजन होने की आशंका से सिलिंडर का माप कराने से भी छुटकारा मिल जाएगा। इंडस्ट्री भी लगातार और विश्वसनीय नेचुल गैस की सप्लाई चाहती है, जिससे क्षमता और अर्थव्सवस्था बढ़ाने के क्षेत्र में लाभ मिल सके।
कर्मशल पीएनजी का प्रयोग होटल, अस्पताल, डेयरी, बेकरी, कोल्डस्टोरेज, मॉल, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, दुकानों, कमर्शल इंस्टिट्यूट और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में उनके किचन, ओवन और बॉयलर के लिए किया जाता है। इन कमर्शल यूनिट्स को पीएनजी की बिना रुके लगातार सप्लाई इन्हें अपने उपभोक्ताओं को बेहतर सर्विस देने में मदद करती है। पाइपलाइन से गैस की डिलिवरी होने से उत्पादन लागत भी घटती है। अगर कमर्शल एलपीजी से तुलना की जाए तो यह आर्थिक रूप से सबसे सस्ता विकल्प है।
उत्तर भारत में पाइप लाइन की सप्लाई का सोर्स हजीरा-विजयपुर-जगदीशपुर (एचवीजे) पाइपलाइन है। जगदीशपुर-हल्दिया-बोकारो-धामरा पाइपलाइन जल्द बिछने वाली है, जो पूर्वी भारत को गेल के गैस ग्रिड से जोड़ेगी। यह पूर्वी भारत में पीएनजी सप्लाई का स्त्रोत होगा। पीएनजी से पहले हर समय पर्याप्त मात्रा में गैस पसप्लाई की सविधा मिलती है। साथ ही एक्सट्रा सिलिंडर को स्टोर नहीं करना पड़ता।
घरेलू उपभोक्ताओं को पीएनजी अपनाने के बाद कई अनावश्यक कामों से छुटकारा मिल गया है। पहले उन्हें बारबार हर महीने सिलिंडर बुक कराना हेता था, डिलिवरीमैन का इंतजार करना पड़ता था। किसी लीकेज या वजन में कम होने की आशंका में सिलिंडर चेक करना पड़ता था। अब सिंलिंडर को लगाने और निकालने के झंझट से भी पीएनजी के उपभोक्ताओं को छुटकारा मिल गया है। इसके अलावा अतिरिक्त सिल्डर रखे जाने की समस्या से भी उन्हें मुक्ति मिली है। पीएनजी से खाना बनाते समय गृहिणियां ज्यादा सुरक्षित रहती है। चूंकि नेचुरल गैस हवा से हल्की होती है इसलिए लीकेज की स्थिति में यह ऊपर उठकर बिखर जाती है, जिससे कई लोग केवल खुलकर सांस नहीं ले पाते, जबकि एलपीजी सिलिंडर लीकेज की स्थिति में जमीनी सतह पर जम जाता है और इससे भयंकर विस्फोट का खतरा रहता है। इसमें यूजर कोखर्च की गई पीएनजी के हिसाब से चार्ज देना पडता है, जबकि एक घरेलू उपभोक्ता को हर दो महीने में एक बार बिल का भुगतान करना पड़ता है। (जो उपभोक्ता की बिलिंग साइकिल पर निर्भर करता है।) नेचुरल गैस जीवाश्म ईंधन को जलाती है और हवा की गुणवत्ता को सुधारती है।