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लखनऊ। विश्व वेदांत संस्थान की ओर से बिना किसी बाधा के राम मंदिर निर्माण के लिए अयोध्या में कलयुग का पहला अश्वमेध यज्ञ 1 से 4 दिसंबर तक किया जाएगा। लखनऊ में 30 नवंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस में विश्व वेदांत संस्थान के संस्थापक आनंदजी महाराज जी ने बताया कि “अब श्रीराम मंदिर निर्माण के आंदोलन को जन आंदोलन बनने से कोई रोक नहीं सकता। अयोध्या में राममंदिर तो बनकर रहेगा। जब सुप्रीम कोर्ट कुछ मामलों में रात में अपना फैसला सुना सकता है तो राममंदिर निर्माण मामले में देर क्यों हो रही है? अगर ऐसे ही चलता रहा तो रामजन्म भूमि मामले में भी मोदी सरकार को अध्यादेश लाना ही होगा। संतों के चलते ही राष्ट्रभक्त व्यक्ति प्रधानमंत्री बना। अब मोदी जी को मंदिर निर्माण की तारीख बतानी होगी। संत और रामभक्त मंदिर निर्माण के लिए बिल्कुल तैयार है”।

आनंदजी महाराज ने कहा कि भारत की कथित धर्मनिरपेक्ष पार्टियां भगवान पर आस्था नहीं रखती। बीजेपी आस्था तो रखती है, पर मंदिर बनवाने के मामले में ऊहापोह में हैं इसीलिए इस अश्वमेध यज्ञ को 1008 पंडित मिलकर पूरा करेंगे और 11000 संत शामिल होंगे। साधु-संत और भारत की आम जनता इसके लिए कमर कस चुकी है। अयोध्या में दिसंबर में होने वाला अश्वमेध महायज्ञ श्रीराम मंदिर निर्माण की दिशा में पहला कदम है। त्रेता युग के बाद कलयुग में पहली बार अयोध्या की पवित्र धरती पर, जहां भगवान श्रीराम ने जन्म लिया था, अश्वमेध यज्ञ होने जा रहा है। विश्व वेदांत संस्थान सभी संतों को जोड़कर राम मंदिर का निर्माण करेगा।

विश्व वेदांत संस्थान के संस्थापक ने कहा कि राममंदिर निर्माण के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश का इंतजार नहीं किया जा सकता। संतों को भव्य राम मंदिर के निर्माण का बीड़ा उठाना होगा। मंदिर का विषय राष्ट्रीय अस्मिता से जुड़ा है। जिस व्यक्ति का अतीत नहीं होता, उसका वर्तमान और भविष्य भी नहीं होता। हमारे देश में विभिन्न मत या संप्रदाय के लोग रहते हैं, लेकिन सबके भगवान श्री राम ही पूर्वज है। हर हिंदू को अपने पूर्वज भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर निर्माण को अपना भरपूर समर्थन देना चाहिए।

महायज्ञ के संयोजक स्वामी आनंदजी महाराज ने बताया कि विश्व वेदांत संस्थान का केंद्र नीदरलैंड में है। भारत के 21 प्रदेश में करीब 10 लाख सदस्य अब तक संस्थान से जुड़ चुके हैं। उन्होंने कहा कि राम मंदिर का निर्माण संतों के आदेश और निर्देशन में ही होगा। संतों का काम हिंदू समाज की रक्षा, धर्म का प्रचार-प्रसार और विस्तार करना है। जो मानव अपने पूर्वजों का सम्मान नहीं करता, वह विनाश की कोख में समा जाता है। सद्भावना के माहौल में मंदिर निर्माण होना चाहिए। अब भारत में हरेक व्यक्ति मंदिर निर्माण के पक्ष में है।