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डिजिटल इंडिया के दौर में आनलाइन खरीदारों की तादाद बढ़ती जा रही है। ऐसे में खुदरा दुकानदारों के लिए ग्राहकों को अपनी ओर आकर्षित करना चुनौती बनता जा रहा है। रिटेल सेक्टर में इस डिजिटल दूरी को कम करने के लिए प्राइस मैप एप आगे आया है। इस एप के जरिये किसी उत्पाद की आनलाइन कीमतों से खुदरा दुकानों पर उपलब्ध कीमतों से तुलना कर सकते हैं और उत्पाद कहां से खरीदें यह तय कर सकते हैं।

प्राइस मैप ऐप ने एक बयान में कहा कि उपभोक्ता इन दिनों ई-कॉमर्स वेबसाइट्स की और से दिए जा रहे आकर्षक ऑफर्स की वजह से ऑनलाइन शॉपिंग करना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। यह चलन खुदरा दुकानदारों के लिए बड़ी चुनौती है।

देश में कई ऐसे स्टार्टअप्स हैं जो ब्रिक एंड मोर्टार रिटेल सेगमेंट को कम से कम कोशिश में ऑनलाइन खरीदारों तक पहुंचाने में विशेष रूप से मदद करने पर फोकस कर रहे हैं। ऐसे ही एक स्टार्टअप है प्राइस मैप ऐप। प्राइसमैप ऐप की बदौलत इंफ्रास्ट्रक्च र और आईटी संसाधनों पर एक भी पैसा खर्च किए बिना रिटेलर्स ऑनलाइन बायर्स से जुड़ रहे हैं।

प्राइस मैप ऐप बाजार में स्थित उन दुकानों को ऑनलाइन बायर्स तक पहुंचाने में सक्षम बनाता है, जिसकी कोई ऑनलाइन मौजूदगी नहीं है। यह ऐप उपभोक्ताओं को क्षेत्र में मौजूद दुकानों पर उनके मनपसंद सामान की उपलब्धता और उनकी कीमतों के बारे में जानकारी देता है।

इस तरह का एक अन्य स्टार्टअप फाइंड है, जो ब्रिक एंड मोर्टार स्टोर्स को अपने अनसोल्ड स्टॉक को डिजिटाइजेशन करने और उन्हें अपने प्रॉडक्ट्स ऑनलाइन बेचने में मदद ककता है।

प्राइस मैप ऐप के संस्थापक सुरेश काबरा ने कहा, “‘केंद्र सरकार को अपनी आगामी ई-कॉमर्स पॉलिसी में ऑनलाइन रिटेलर्स से छोटे स्वतंत्र कारोबारियों के हितों की सुरक्षा की समुचित व्यवस्था करनी चाहिए और इस संबंध में नई नीतियां बनानी चाहिए जो बदलते शॉपिंग ट्रेंड के लिहाज से बहुत जरूरी है। फिलहाल तो ऑनलाइन कारोबारी यूजर्स को अपनी ओर खींचने के लिए पानी की तरह पैसा बहा रहे हैं।”

मॉडल टाउन स्थित जगोता इलेक्ट्रॉनिक के मालिक रजत जगोता ने कहा, ‘अगर इस बदलती दुनिया में रिटेलर्स को अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसी ऑनलाइन कंपनियों के आगे टिकना है तो उन्हें टेकसेवी होना ही पड़ेगा। प्राइप मैप ऐप उन्हें अपनी मौजूदगी महसूस कराने में मदद दे रहा है।’

लाजपत नगर में इलेक्ट्रॉनिक पैराडाइज के फ्लोर मैनेजर कुछ समय से प्राइस मैप ऐप का इस्तेमाल कर रहे हैं। राजकमल का कहना है, “ऑनलाइन कारोबारी यह अंधविश्वास फैला रहे हैं कि वह प्रॉडक्ट्स की सस्ते दामों पर बिक्री कर रहे हैं। कोई भी सामान ऑनलाइन खरीदने से पहले प्राइसमैप ऐप से यह चेक करना चाहिए कहीं वह सामान आसपास की दुकानों पर ऑनलाइन से सस्ता तो नहीं मिल रहा है।”

दिल्ली के खन्ना मार्केट में मोबाइल शॉप ओनर गिरीश ने कहा कि अब प्राइस मैप ऐप हमें तुरंत बता देता है कि किस कीमत पर कोई खास मोबाइल फोन यूजर को ऑनलाइन मिल रहा है। अब हम 99 फीसदी मामलों में मार्केट में अपनी दुकानों पर ऑनलाइन से कम कीमत में वही मोबाइल ग्राहकों को ऑफर करने की हालत में होते हैं।