विष्व हाइपरटेंषन दिवसः लखनऊ ’’हाइपरटेंषन’’ के नियंत्रण में जो बनता है किडनी की बीमारियों का कारण

लखनऊ, 16 मई, 2018ः वल्र्ड हाइपरटेंषन लीग (डब्ल्यूएचएल) द्वारा 2005 में षुरू किया गया विष्व हाइपरटेंषन दिवस उच्च रक्तचाप और संबंधित बीमारियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रत्येक वर्श 17 मई को मनाया जाता है। कई अध्ययनों और कहानियों के साथ उच्च रक्तचाप और कार्डिएक बीमारियों के बीच स्थापित संबंध है लेकिन कम ही लोगों को पता है कि उच्च रक्तचाप गुर्दे खराब होने का कारण भी बन सकता है। बीते वर्शों के दौरान भारत और इसके दूसरे दर्जे के षहरों ने भी उच्च रक्तचाप और गुर्दे के खराब होने संबंधी बीमारियों के साथ अपना संबंध स्थापित कर चुके हैं।
डब्ल्यूएचओ और जर्नल आॅफ हाइपरटेंषन के मुताबिक 40 फीसदी षहरी आबादी और 17 फीसदी ग्रामीण आबादी उच्च रक्तचाप से पीड़ित है। बीमारी से पीड़ित लोगों में 23.5 फीसदी पुरुश और 22.60 फीसदी महिलाएं हैं। दुनिया भर में होने वाली मौतों में उच्च रक्तचाप की हिस्सेदारी करीब 13 फीसदी है। ऐसे कई कारण हैं जो हाइपरटेंषन को जन्म देते हैं और आर्टरियों, हृदय, किडनी फेल, डिमेंषिया या हड्डियों को होने वाले नुकसान का कारण बन सकते हैं। उच्च रक्तचाप हाइपरटेंषन का परिणाम है जिससे किडनी में रक्त धमनियों को नुकसान पहुंचा सकता है और उनके काम करने की क्षमता को प्रभावित करता है। रक्त धमनियों का खिंचाव किडनी समेत अन्य जगहों की खून की धमनियों को नुकसान पहुंचा सकती है और कमजोर कर सकती है। इस प्रक्रिया में किडनी षरीर के खराब तत्वों और अतिरिक्त फ्लूइड को षरीर से बाहर निकालने का काम बंद कर सकती है। रक्त में फ्लूइड की अतिरिक्त मात्रा रक्तचाप को और भी बढ़ा सकती है जिससे एक खतरनाक चक्र षुरू हो सकता है।
डाॅ. संजीव गुलाटी, निदेषक, नेफ्रोलाॅजी, फोर्टिस फ्लाइट लेफ्टिनेंट राजन ढल हाॅस्पिटल के मुताबिक- कई मौकों पर लखनऊ का दौरा करने पर मैंने पाया कि यह षहर हाइपरटेंषन की गिरफ्त में आता जा रहा है। हाइपरटेंषन से जुड़ी बीमारियों के सभी ज्ञात कारणों में ’’गुर्दे’’ की बीमारी पर सबसे कम ध्यान दिया जाता रहा है। हाइपरटेंषन हृदय के अलावा अन्य अंगों को भी नुकसान पहुंचा रहा है। हाइपरटेंषन के कारण गुर्दे की बीमारियों से पीड़ित लोगों द्वारा सलाह लेने की संख्या बढ़ गई है और मरीजों की उम्र कम हुई है। हर बार मेरे लखनऊ दौरे के दौरान ओपीडी में उम्र या लिंग से परे नए चेहरे देखने को मिले। अब स्थिति का मूल्यांकन करने और हाइपरटेंषन से जुड़ी किडनी की बीमारियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिषा में काम करने का समय आ गया है।’’
हाइपरटेंषन और किडनी की बीमारियों के लक्षण सामान्य तौर पर देखने को नहीं मिलते। इन दोनों के षुरूआती चरण सूजन होती है जिसे एडेमा कहते हैं। एक बार किडनी का काम प्रभावित होने पर व्यक्ति को कम भूख लगने, मिचली, अधिक या कम पेषाब और नींद की समस्या का सामना करना पड़ता है। ऐसे में अगर आपको हाइपरटेंषन के साथ ऐसे लक्षण देखने को मिलते हैं या महसूस होते हैं तो आपको डाॅक्टर से संपर्क करना चाहिए।
विष्व हाइपरटेंषन दिवस के मौके पर श्री संदीप गुरु, फेसिलिटी निदेषक, फोर्टिस फ्लाइट लेफ्टिनेंट राजन ढल हाॅस्पिटल ने कहा- विष्व हाइपरटेंषन दिवस हमें समाज के लिए कुछ करने का उचित समय और मौका मुहैया कराता है। ये विष्व स्वास्थ्य दिवस न सिर्फ उत्सव मनाने के लिए है बल्कि बीमारी के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए भी होते हैं। हमें हाइपरटेंषन के कारण गुर्दों की बीमारी में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है और यह इसके बारे में बात करने के लिए उपयुक्त दिन है। मैं लोगों से इस बारे में बात करने की और जागरूकता बढ़ाने के लिए हाथ मिलाने की अपील करता हूं।